Technical Analysis in Hindi

जब निवेश के फैसले की बात आती है, तो ज्यादातर लोगों के शुरुआती विचार कंपनी की बिक्री, कमाई या इसकी बैलेंस शीट के वारे में होते हैं ताकि इसके सही मूल्य का आकलन किया जा सके। ये फंडामेंटल विश्लेषण पर आधारित हैं। 

तकनीकी विश्लेषण को हम एक अलग दृष्टिकोण से देखते है।

तकनीकी विश्लेषण ऐतिहासिक डेटा के आधार पर शेयरों की भविष्य की प्राइस की भविष्यवाणी करने की प्रक्रिया है। आपने एक कहावत तो सुनी होगी जिसे हम बचपन से सुनते आ रहे हैं “इतिहास खुद को दोहराता है”। तकनीकी विश्लेषण लगभव इसी कहावत पर काम करता है। तो आज इस लेख में हम Technical Analysis in Hindi को समझेंगे कि तकनीकी विश्लेषण क्या है और एक ट्रेडर को तकनीकी विश्लेषण क्यों सीखना चाहिए।

तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) किसी स्टॉक के पिछले दिनों/सप्ताह/महीने/वर्षों में ट्रेड किए गए स्टॉक की कीमत और वॉल्यूम से संबंधित है।

इसमें विभिन्न प्रकार के शेयर मार्केट चार्ट, तकनीकी इंडीकेटर, ऐतिहासिक डेटा और स्टॉक के भविष्य के प्राइस मूवमेंट की भविष्यवाणी करने के लिए इसमें कई अन्य तकनीकी पहलू शामिल हैं।

इस लेख में, हम शेयरों के तकनीकी विश्लेषण के अंतर्गत आने वाली हर चीज पर चर्चा करेंगे।

हम सबसे पहले तकनीकी विश्लेषण के वारे में समझेंगे फिर उसके प्रकार से शुरू करेंगे, फिर हम तकनीकी विश्लेषण का उपयोग करके ट्रेंडिंग की विभिन्न टूल के बारे में बात करेंगे।

फिर आप तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) में उपयोग होने बाले चार्ट, महत्वपूर्ण पहलु और बहुत अधिक विवरणों के बारे में पढ़ेंगे।

तकनीकी विश्लेषण क्या है? 

लोग सोचते हैं के इंट्राडे के लिए स्टॉक का चुनाव कैसे करें? टेक्निकल एनालिसिस या तकनीकी विश्लेषण इसी लिए ही तो है.

शेयरों का तकनीकी विश्लेषण प्राइस, वॉल्यूम और स्टॉक के अन्य कारकों का विश्लेषण करके शेयर के भविष्य प्राइस का अनुमान लगाने का एक तरीका है।

तकनीकी विश्लेषण का अर्थ सरल है और यह विश्लेषण का ही एक रूप है जो ट्रेडर्स को प्राइस मूवमेंट को समझने में मदद करता है। यह न केवल शेयरों पर लागू होता है। वल्कि आप इसका उपयोग सभी प्रकार के ट्रेड योग्य निवेश साधनों जैसे कमोडिटी, कंरेसी, डेरिवेटिव और अन्य के लिए कर सकते हैं। 

यह पिछले दिन या पिछले सप्ताह/माह या कुछ वर्षों में ट्रेड किए गए स्टॉक की प्राइस और वॉल्यूम को ध्यान में रखता है। और पिछ्ले डेटा के आधार पर ट्रेडर को स्टॉक की कीमत के रुझान का विश्लेषण करने में मदद करता हैं।

तकनीकी विश्लेषण के लिए विभिन्न टूल हैं जिनमें चार्ट, तकनीकी इंडीकेटर और कई अन्य रणनीतियां शामिल हैं।

उदाहरण के लिए, 5 मिनट का चार्ट या 30 मिनट का चार्ट – जहां किसी विशेष स्टॉक की कीमत और वॉल्यूम को प्रदशित किया जाता है।

शेयर बाजार में जितने भी ट्रेडर्स है वह सभी अपने ट्रेडिंग निर्णय लेने के लिए तकनीकी विश्लेषण का उपयोंग करते है क्योकि तकनीकी विश्लेषण एक ट्रेडर को ऐसे सभी टूल देता है जो एक ट्रेडर को किसी भी स्टॉक या इंडेक्स का विश्लेषण करने और मार्केट के ट्रेंड को समझने के लिए के लिए जरुरी होते है। 

तकनीकी विश्लेषण के प्रकार

तकनीकी विश्लेषण या टेक्निकल एनालिसिस करने के काफी तरीके हो सकते है। उसके बारे में नीचे बताया गया है पर आपको एक इंट्राडे ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी (Intraday Trading Strategy in Hindi) ज़रूर लेकर चलनी पड़ेगी ताकि आपको नुक्सान का सामना न करना पड़े. कई नए निवेशकों को ये जानना होता है कि इंट्राडे ट्रेडिंग कैसे सीखें (Intraday Trading kaise sikhen)?

अभी हम जानेंगे वो सब बातें जो इंट्राडे ट्रेडिंग की शुरुआत में ही आपको पता होनी चाहिए।

तकनीकी विश्लेषण को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है जो हैं:

1. टॉप-डाउन दृष्टिकोण 

जब ट्रेडर या निवेशक पहले अर्थव्यवस्था को देखता है और फिर सेक्टर का विश्लेषण करता है और फिर तकनीकी विश्लेषण की मदद से उस सेक्टर के स्टॉक का विश्लेषण कर निवेश करने का निर्णय लेता है, तो इसे टॉप-डाउन दृष्टिकोण के रूप में जाना जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो, जो व्यक्ति इस दृष्टिकोण का उपयोग करके स्टॉक का विश्लेषण करता है, वह पहले मैक्रोइकॉनॉमिक  कारकों की जांच करता है – फिर समग्र अर्थव्यवस्था, फिर उस सेक्टर की जिस सेक्टर में वह स्टॉक आता है सबसे बाद में वह स्टॉक का विश्लेषण करता है। 

तकनीकी विश्लेषण के लिए इस दृष्टिकोण का उपयोग करने वाले ट्रेडर्स या निवेशक 50 दिन का मूविंग ऐवरेज और उन शेयरों की तलाश कर सकते हैं जो बाजार और उद्योग के औसत मूल्य से ऊपर निकल जाते हैं।

2. बॉटम अप दृष्टिकोण

यह दृष्टिकोण व्यक्तिगत स्टॉक से संबंधित है। इसमें ट्रेडर या निवेशक ऐसे शेयरों को देखता है जिनमें भविष्य में संभावित वृद्धि होती है। एक ट्रेडर किसी स्टॉक में प्रवेश करने से पहले तकनीकी विश्लेषण की मदद से ऐसे पॉन्ट्स ढूढता है जहां उसे किसी स्टॉक में प्रवेश करना है और लाभ होने पर किस विंदु पर निकल जाना है।

इसलिए, ट्रेडर तकनीकी विश्लेषण टूल – चार्ट या इंडीकेटर का उपयोग उस कीमत का पता लगाने के लिए करेगा जहां वह लाभ के लिए स्टॉक खरीद सकता है।

जो शेयर बाजार में इंट्राडे ट्रेडिंग करते है वह ज्यादातर बॉटम अप दृष्टिकोण को ही अपनाते है क्योंकि उन्हे कुछ मिनट से लेकर कुछ घन्टों तक पोजिशन रखनी होती है जिस बजह से उन्हे सेक्टर, अर्थव्यवस्था आदि देखने की जरुरत ही नही पड़ती है।

तकनीकी विश्लेषण कैसे काम करता है?

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones) के निर्माता और वॉल स्ट्रीट जर्नल के संस्थापक चार्ल्स डॉव ने 1800 के दशक के अंत में अखबार में एक नियमित कॉलम के माध्यम से शेयर बाजार ट्रेडिंग करने बालो के तकनीकी विश्लेषण पेश किया। इसके अलावा स्टॉक मूल्य पैटर्न पर उनके विचारों को डॉव थ्योरी के रूप में भी जाना जाने लगा।

ऐतिहासिक डेटा के साथ किसी भी स्टॉक या इंडेक्स पर तकनीकी विश्लेषण लागू किया जा सकता है, स्टॉक से बॉन्ड तक, करेंसी से कमोडिटी तक और भी मार्केट। इस तरह से हम कह सकते है कि जब तक किसी स्टॉक के पिछले मूल्य की जानकारी है, तब तक उस पर तकनीकी विश्लेषण का उपयोग करने का अवसर है। 

तकनीकी विश्लेषण में, पिछले प्राइस व्यवहार को भविष्य की कीमतों की भविष्यवाणी करने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। ट्रेंड की पहचान करने और सही ट्रेडिंग निर्णय लेने के लिए  विभिन्न प्रकार के इंडीकेटर्स  का उपयोग किया जाता है।

तकनीकी विश्लेषण से पता चलता है कि सभी शेयर बाजार के शेयरों की जानकारी प्राइस में ही छिपी होती है, और यह इतिहास खुद को दोहराने की संभावना है। यह आवश्यक रूप से ठीक उसी तरह नहीं माना जाता है, लेकिन निश्चित रूप से समान पैटर्न में होता है।

बेशक, तकनीकी विश्लेषण में कभी – कभी ऐसा होता है कि अलग-अलग विश्लेषक एक ही डेटा की अलग-अलग व्याख्या कर रहे हो।

ऐसा इसलिए होता है क्योकि हर एक इंसान के देखने का नजरीया अलग – अलग होता है जिस कारण से एक ट्रेडर समान चार्ट का विश्लेषण कर सैल पोजिशन लेने का निर्णय करता है, बही दूसरी तरफ एक दूसरा ट्रेडर उसी चार्ट का विश्लेषण कर खरीदने का निर्णय लेता है। 

तकनीकी विश्लेषण के लिए उपयोग किए जाने वाले चार्ट

किसी स्टॉक के ट्रेंड को समझने के लिए तकनीकी विश्लेषण चार्ट का उपयोग किया जाता है। ट्रेडर्स के लिए अपने विश्लेषण को जारी रखने के लिए चार्ट सबसे महत्वपूर्ण उपकरणों में से एक है।

चार्ट का मतलव है जैसा कि आप जानते हैं, कुछ मापदंडों को समझने के लिए ग्राफिक रूप से प्रस्तुत संख्याएं हैं। यहां, चार्ट स्टॉक और शेयर की प्राइस और वॉल्यूम को प्रदर्शित करते हैं।

ऐतिहासिक मूल्य और वॉल्यूम डेटा को एक निश्चित समय अंतराल के आधार पर चार्ट पर प्लॉट किया जाता है। समय-अंतराल के साथ-साथ अन्य मापदंडों के आधार पर कई चार्ट पैटर्न हैं जिनकी चर्चा हम आगे करेंगे।

यहां, हम आपको विभिन्न प्रकार के चार्ट के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको किसी भी तकनीकी विश्लेषण सॉफ्टवेयर पर जाते हैं। एक वेहतर ट्रेडर बनने के लिए आपको के लिए आपको तकनीकी विश्लेषण को अच्छे से सीखना चाहिए।

1. लाईन चार्ट

जैसा कि नाम से पता चलता है, लाइन चार्ट चार्टिंग पैटर्न के सबसे सामान्य रूपों में से एक है। इसमें आपको ग्राफ़ के बाईं ओर से शुरू होकर दाईं ओर जाने वाली एक सिंगल रेखा मिलेंगी। जो कि स्टॉक के मूल्य को प्रदर्शित करती है।

ये रेखाएं किसी स्टॉक/इंडेक्स/ की समाप्ति कीमतों का प्रतिनिधित्व करती हैं। हालांकि, क्लोजिंग प्राइस के बजाय अन्य प्राइस वेरिएबल्स जैसे ओपनिंग प्राइस, हाई या लो प्राइस का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन सबसे सटीक भविष्यवाणी के लिए, क्लोजिंग प्राइस को इस चार्ट में रेखांकन किया गया है।

ऐतिहासिक डेटा से जुड़े मौजूदा समय में सामान्य प्राइस मूवमेंट को समझने के लिए ये लाइन चार्ट आवश्यक हैं। हालांकि यह शेयर के प्राइस मूवमेंट की अंतर्दृष्टि पर अधिक प्रकाश नहीं डालता है, इसका उपयोग शुरुआती लोग ट्रेंड को समझने के लिए कर सकते है।

2. बार चार्ट

लाइन चार्ट के बाद, बार चार्ट ट्रेडर्स के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। यह विश्लेषण के लिए एक बुनियादी टूल है और यह स्टॉक की सभी चार महत्वपूर्ण कीमतों को प्रस्तुत करता है। जैसे – ओपनिंग प्राइस, हाई या लो प्राइस और क्लोजिंग प्राइस।

बार चार्ट में एक लंबवत रेखा (Vertical Line) श्रृंखला शामिल है। ये रेखाएं चार्ट की समय सीमा के अनुसार उल्लिखित कीमतों का प्रतिनिधित्व (represent ) करती हैं। 

बार चार्ट में कीमतों में अंतर करने के लिए अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रेडर्स के लिए बार चार्ट अत्यधिक उपयोगी होते हैं क्योंकि ये एक ही ग्राफ पर सभी प्राइस प्रदान करता हैं और ट्रेडर के लिए परिवर्तनों को ट्रैक करना और प्राइस मूवमेंट की भविष्यवाणी करना आसान बनाते हैं।

3. कैंडलेस्टिक चार्ट 

कैंडलेस्टिक चार्ट ट्रेडर्स द्वारा सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने बाला चार्ट है क्योंकि ये समझने में बहुत ही आसान और एडवांस फीचर के साथ आता है। 

अगर आपने किसी ट्रेडर को अपने सहयोगी से बात करते सुना है, तो आपने कैंडलेस्टिक का नाम जरूर सुना होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि कैंडलस्टिक चार्ट इस विश्लेषण में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले और महत्वपूर्ण चार्टों में से एक हैं। 

इस चार्ट को कैंडलस्टिक चार्ट कहा जाता है क्योंकि इस चार्ट का आकार मोमबत्ती की आकृति होता है। एक मोटी मोमबत्ती की तरह शरीर और ऊपर या नीचे की ओर फैली एक एकल रेखा के साथ यह मोमबत्ती की तरह दिखाई देता है।

इन ऊपरी और निचले छोरों को अपर विक और लोअर विक के रूप में जाना जाता है। जबकि अपर विक का उच्चतम बिंदु उच्च मूल्य का दर्शाता है, लोअर विक का सबसे निचला बिंदु उस स्टॉक की सबसे कम कीमत को  दर्शाता है जिसका आप विश्लेषण कर रहे हैं।  

कैंडलेस्टिक पैटर्न दोनों भागों- वोडी और विक द्वारा बनाए जाते हैं। कैंडलस्टिक्स चार्ट प्राइस मूवमेंट व ट्रेंड को कम अवधि के भीतर भी समझने के लिए सबसे अधिक फायदेमंद होते हैं। 

यह सबसे महत्वपूर्ण है जब हमें किसी स्टॉक का अपट्रेंड या डाउनट्रेंड पता लगाना होता है। कैंडलस्टिक चार्ट की बोडी खुलने और बंद होने की कीमतों के बीच के अंतर को दर्शाता है। जब शेयर की कीमत गिरती है तो यह लाल रंग में और कीमत बढ़ने पर हरे रंग में दिखती है।

अगर आप एक नये ट्रेडर है तो आपको मेरी आपको एक सलाह है, यहां आप हर एक चार्ट को अच्छी तरह समझलो की ये क्या होते है फिर आपको सिर्फ़ कैंडलेस्टिक चार्ट ही सीखना चाहिए। एक वार जब आप कैंडलेस्टिक चार्ट को अच्छे से समझ लेंगे तो आपको कोई और चार्ट सीखने की जरुरत नही पडेगी।

4. रेन्को चार्ट

यह पूरी तरह से एक अलग तरह का चार्टिंग पैटर्न है। यह चार्ट न ही समय सीमा और न ही ट्रेडिंग वॉल्यूम पर को दर्शाता है। यह केवल प्राइस मूवमेंट के आधार पर काम करता है।

इसमें लाल या काले और सफेद या हरे रंग की ईंटें होती हैं। जबकि सफेद या हरे रंग ऊपर की ओर की कीमतों को दर्शाती है, दूसरा लाल / काला नीचे की ओर की कीमतों को दर्शाती है। 

इस चार्टिंग को करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक एक ईंट की तरह होती है जब कीमत पिछली ईंट की तुलना में ऊपर या नीचे की ओर बढ़ती है और पर्याप्त मूल्य से बढती है। और इन ईंटों के बनने के पीछे अन्य मानदंड भी हैं।

ईंटों को कभी-कभी एक मिनट के भीतर रखा जा सकता है और इसमें एक या अधिक दिन भी लग सकते हैं। यह बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है।

जबकि यह चार्टिंग पैटर्न किसी स्टॉक में सपोर्ट और रेजिसटेंस को समझने के लिए उपयोगी हो सकता है। क्योंकि बाजार के मिजाज को समझना मुश्किल है।

5. हेइकिन आशि चार्ट

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, हेइकिन आशि एक चार्टिंग पैटर्न और उन्नत तकनीकी विश्लेषण की अवधारणा है। यानि की ये एक बहुत ही अनुभवी ट्रेडर्स के लिए है क्योंकि ये ऐडवांस चार्ट है। 

यह जापान में उत्पन्न हुआ था और अब दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में इसका उपयोग ट्रेडर्स के ट्रेड और मार्केट विश्लेषण के लिए किया जाता है। यह कैंडलस्टिक चार्ट की तरह है लेकिन एक अंतर के साथ।

दोनों के बीच मुख्य अंतर यह है कि हेइकिन आशि चार्ट शेयर की औसत कीमत को दर्शाता हैं, न कि सटीक ओपनिंग और क्लोजिंग प्राइस।

हेइकिन आशि औसत प्राइस की गणना और समय अवधि के अनुसार ग्राफ पर प्लॉट करता है। यह अपट्रेंड और डाउनट्रेंड को अधिक आसानी से और बेहतर स्पष्टता के साथ समझने में मदद करता है। 

हेइकिन आशि चार्ट उसी रंग में कीमतों का दर्शाता हैं जैसे कैंडलस्टिक चार्ट करते हैं। इसलिए, जब कीमत ऊपर की ओर बढ़ती है और एक अपट्रेंड (मजबूत) होता है – यह लगातार हरी हेइकिन आशि कैंडल द्वारा दर्शाया जाता है।

जब कोई अपट्रेंड ट्रेंड होता है, तो बिना किसी नीचले विक के लगातार हरी कैंडल बनती रहती हैं। इसी तरह, जब कोई डाउनट्रेंड होता है, तो बिना किसी ऊपरी विक के लगातार लाल कैंडल बनती रहती हैं।

हेइकिन आशि चार्ट स्विंग ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए उपयोगी होते हैं। जिस दिन ट्रेडर इसे तकनीकी इंडीकेटर के रूप में अधिक उपयोग करते हैं, चार्ट के रूप में नहीं। इस चार्ट का लाभ यह है कि इसे व्यक्तिगत रूप से उपयोग किया जा सकता है। 

तकनीकी विश्लेषण के महत्वपूर्ण पहलु

तकनीकी विश्लेषण चार्ट बहुत सारे मापदंडों से मिलकर बने होते हैं और इन तकनीकी विश्लेषण टूल का ठीक से उपयोग करने के लिए सभी मापदंडों को समझना महत्वपूर्ण है. इन पहलुओं को आप इंट्राडे ट्रेडिंग के रूल (Intraday Trading Rules in Hindi) या नियम भी समझ सकते हैं.

1. ट्रेंड एंड ट्रेंड लाइन

ये चार्ट के सबसे महत्वपूर्ण कारको में से एक ट्रेंड लाइन है। यह वह रेखा है जो एक शेयर की कीमत प्रवृत्ति को इंगित करने में मदद करती है जिसके लिए कि एक ट्रेडर चार्ट पर विश्लेषण करता है।

शेयर प्राइस का ट्रेंड जानने के लिए ये रेखाएं विभिन्न प्रकार के चार्ट पर खींची जा सकती हैं। इससे या तो हमें अपट्रेंड मिलता है या डाउनट्रेंड जो कि एनालिस्ट्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण टेक्निकल इंडिकेटर की तरह है।

जब कोई स्टॉक लगातार ऊपर जाते जाता है तो उसे अपट्रेंड कहा जाता है, जबकि जब कोई स्टॉक लगातार नीचे जाते जाता है तो उसे डाउनट्रेंड कहा जाता है।।

उदाहरण के लिए, यदि पिछला हाई 100 था तो आज यह 110 हो गया और पिछला लो 70 था, आज यह 80 हो गया। इसी तरह, ये अपट्रेंड की विशेषता है। और अगर इसके विपरीत होता है तब ये डाउनट्रेंड विशेषता है।

एक ट्रेंड अलग-अलग टाईमफ्रेम के भी हो सकते है। एक अल्पकालिक ट्रेंड, दीर्घकालिक ट्रेंड और एक मध्यवर्ती-अवधि का ट्रेंड भी हो सकता है। एक सिंगल स्टॉक इन तीनों शर्तों में अलग-अलग ट्रेंड का अनुभव कर सकता है।

यह शॉर्ट टर्म में अपट्रेंड और लॉन्ग टर्म ट्रेंड में डाउनट्रेंड और इसके विपरीत भी हो सकता है। इस प्रकार, ट्रेंड का विश्लेषण करते टाईमफ्रेम को शामिल करना आवश्यक है।

2. वॉल्यूम

वॉल्यूम, इसे सरल शब्दों में कहें तो प्राइस और मात्रा पर आधारित है। तो, इस प्रकार के विश्लेषण में वॉल्यूम महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। वॉल्यूम शेयरों की संख्या है जो एक ही दिन में एक विशेष शेयर के लिए ट्रेड किया गया है (हालांकि यह कोई भी अवधि हो सकती है)।

इसलिए, उदाहरण के लिए, आज एबीसी कंपनी में 10 लाख शेयरों का कारोबार होता है, इसलिए एबीसी कंपनी के शेयरों के लिए ट्रेडिंग वॉल्यूम 10 लाख है। वॉल्यूम किसी शेयर के ट्रेंड या प्राइस मूवमेंट की ताकत को समझने में मदद करता है। वॉल्यूम के आधार पर ही हमें किसी भी शेयर की लिक्डिटी का पता चलता है। 

वॉल्यूम ट्रेड किए जाने वाले शेयरों की संख्या है जो शेयर के ट्रेंड की ताकत को निर्धारित करता है क्योंकि यदि 100 शेयरों का कारोबार ऊपर की ओर होता है, और 1 लाख शेयरों का कारोबार किसी अन्य स्टॉक में ऊपर की ओर होता है, तो बाद वाला स्टॉक बहुत मजबूती से अपनी दिशा में जायेगा। 

आम तौर पर, वॉल्यूम को नीचे चार्ट में दर्शाया जाता है और बार जितना ऊंचा होता है, ट्रेड किए गए शेयरों की मात्रा उतनी ही अधिक होती है। 

3. मोमेंटम 

मोमेंटम, ये तकनीकी विश्लेषण का तीसरा कारक है जिसे आपको समझने की आवश्यकता है।

मोमेंटम स्टॉक, इंडेक्स या कोई भी ट्रेडेबल इंस्ट्रूमेंट में मूल्य परिवर्तन की गति या वेग है। मोमेंटम एक समय अवधि में कीमतों में बदलाव की दर को दर्शाता है जिससे ट्रेडर या निवेशकों को एक ट्रेंड की ताकत को समझने में मदद मिलती है। मोमेंटम स्टॉक्स जो मोमेंटम की ताकत के साथ चलते हैं, मोमेंटम स्टॉक कहलाते हैं।

मोमेंटम को आरएसआई इंडीकेटर के साथ मिलाया जाता है जो 0 से 100 तक शेयरों को मूल्य प्रदान करता है। यह आमतौर पर बाजार की अधिक खरीद या ओवरसोल्ड स्थितियों के निर्धारण के लिए है। 

4. सपोर्ट और रजिस्टेंस

इन दोनों को तकनीकी विश्लेषण की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से एक के रूप में संदर्भित किया जा सकता है।

यदि आप ट्रेडर या निवेश को साक्षात्कार में बोलते हुए या टीवी पर शेयरों के दैनिक प्राइस मूवमेंट के बारे में बात करते हुए सुनते हैं, तो आपको इन दोनो का नाम जरुर सुना होगा। ठीक है, इसलिए सपोर्ट और रजिस्टेंस दो प्राइस स्तर हैं जो एक बार टूट गए, तो तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार एक ट्रेंड रिवर्शल की उम्मीद है।

सपोर्ट एक प्राइस लेवल है जहां स्टॉक की मांग इतनी अधिक है कि कीमत उससे नीचे नहीं जा सकती है। इसे पिछले हाई के रूप में संदर्भित किया जा सकता है।

रजिस्टेंस एक प्राइस लेवल है और है जहां स्टॉक की आपूर्ति अधिक होती है और इस प्रकार कीमत उस स्तर से ऊपर नहीं बढ़ सकती है।

अब, यदि सपोर्ट स्तर टूट गया है या यदि कीमत सपोर्ट स्तर से नीचे गिरती है, तो यह एक मंदी की प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है और जब रजिस्टेंस स्तर टूट जाता है, तो एक ऊपर की ओर या तेजी की प्रवृत्ति का इशारा करता है।

इस तथ्य के अनुस्सर कीमत इन दोनो स्तरों के बीच चलती है और इन दोनों स्तरों में से किसी एक को तोड़ना एक रिवर्शल का संकेत देता है, इन दोनों अवधारणाओं को ट्रेडर्स के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

5. ऑसिलेटर्स और इंडीकेटर्स

अंत में, ऑसिलेटर्स और इंडीकेटर्स पर आते हैं जिन्हें चार्ट के अलावा तकनीकी विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण टूल  माना जाता है। इंडीकेटर्स और कुछ नहीं बल्कि गणितीय गणनाएं हैं जो आंकड़ों पर आधारित हैं। जो ट्रेडर्स को ट्रेडिंग निर्णय लेने में मदद करते है। 

ज्यादातर मामलों में प्राइस और वॉल्यूम आंकड़े हैं। ये इंडीकेटर्स, बाजार में खरीद और बिक्री के संकेत के लिए बनाए गए हैं। किसी ट्रेड में प्रवेश और निकास को समझने के लिए यह आवश्यक माने जाते है।

कई इंडीकेटर्स बाजार की ओवरबॉट और ओवरसोल्ड स्थिति को समझने में मदद करते हैं। ऑसिलेटर्स कुछ और नहीं बल्कि इंडीकेटर हैं जिनका उपयोग समान कारकों और स्थितियों को इंगित करने के लिए कम समय में किया जा सकता है। 

ट्रेडिंग में सबसे ज्यादा उपयोग होने बाले इंडीकेटर्स 

1. मूविंग एवरेज

मूविंग एवरेज ट्रेडिंग में अक्सर इस्तेमाल किया जाने वाला इंट्राडे ट्रेडिंग इंडीकेटर है।

यह मार्केट के मूवमेंट, मार्केट में रुझान, मार्केट रिवर्शल, और स्टॉप-लॉस पॉइंट्स के बारे में जानकारी प्रदान करता है। मूविंग एवरेज ट्रेडर्स को वर्तमान मार्केट की दिशा में ट्रेडिंग अवसरों का पता लगाने में मदद करता है।

2. बोलिंगर बैंड

बोलिंगर बैंड मार्केट के उतार-चढ़ाव का संकेत देता हैं। बोलिंगर बैंड 3 प्रकार के होते हैं: एक मध्यम बैंड जो 20-डे सिंपल मूविंग ऐवरेज, दूसरा a+2 मानक विचलन (standard deviation) ऊपरी बैंड और तीसरा a -2 निचला विचलन (lower deviation) बैंड होता है।

किसी स्टॉक की कीमत ऊपरी और निचले बैंड के बीच चलती रहती है। जब मार्केट चल रहा होता है और अस्थिरता (volatility) अधिक होती है, तो बैंड चौड़ा हो जाता है और जब अस्थिरता (volatility) कम हो जाती है तो इन बैंड के बीच का अंतर कम हो जाता है।

बोलिंगर बैंड ट्रेडर्स को किसी विशेष स्टॉक की प्राइस रेंज को समझने में मदद करता हैं।

3. रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI)

रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) एक मोमेंटम इंडिकेटर है। जिसमें 0 से 100 तक की एक सिंगल लाइन होती है जो इंगित करती है कि किसी स्टॉक में कब ओवरबॉट या ओवरसोल्ड की स्थिती आती है।

यदि रीडिंग 70 से ऊपर है, तो यह एक ओवरबॉट मार्केट की ओर इशारा करता है और यदि रीडिंग 30 से नीचे होती है, तो यह एक ओवरसोल्ड मार्केट की ओर इशारा करता है।

आरएसआई इंडिकेटर का उपयोग बाजार के ट्रेंड का अनुमान लगाने के लिए भी किया जाता है, यदि आरएसआई 50 से ऊपर है, तो बाजार में एक अपट्रेंड माना जाता है और यदि आरएसआई 50 से नीचे है, तो बाजार एक डाउनट्रेंड में माना जाता है।

4. VWAP- वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस 

इंट्राडे ट्रेडिंग करते समय, ट्रेडर्स को एक विशेष स्टॉक में वॉल्यूम को ट्रैक करने की आवश्यकता होती है। VWAP एक विशेष टाईमफ्रेम में ट्रेड किए गए स्टॉक के प्राइस के अनुपात का एक वॉल्यूम इंडिकेटर है, जो किसी विशेष स्टॉक के लिए उस स्टॉक पर ट्रेड किए गए कुल वॉल्यूम के अनुपात में दिया होता है।

जब किसी स्टॉक की प्राइस VWAP से ऊपर होती है, तो यह इंडिकेटर एक बुल ट्रेंड को इंगित करता है।

इसका मतलब है कि कीमत औसत वॉल्यूम से ऊपर है और ट्रेंड पोजिटिव है। इसी तरह, एक वियर ट्रेंड की पुष्टि की जा सकती है जब प्राइस VWAP लाइन से नीचे चल रही हो। 

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