डिविडेंड मीनिंग इन हिंदी

शेयर बाजार में निवेश करके न ही आप किसी कंपनी में हिस्सेदारी पाते है लेकिन साथ ही आप कंपनी में हो रहे मुनाफे के भी हिस्सेदार बन सकते है।  जी हाँ! काफी कंपनी अपने मुनाफे का कुछ प्रतिशत अपने शेयर धारकों को देती है जिसे आम भाषा में डिविडेंड कहा जाता है। अगर आप शेयर मार्केट में नए है और स्टेबल इनकम और रिटर्न की ओर देख रहे है तो जाने डिविडेंड मीनिंग इन हिंदी।

Dividend Meaning in Share Market in Hindi

जब भी आप शेयर मार्केट में निवेश करते है तो शेयर प्राइस बढ़ने पर आप एक अच्छे रिटर्न और मुनाफे की आशा करते है, लेकिन क्या आपको पता है कि शेयर मार्केट में कुछ कंपनी आपको डिविडेंड देती है

डिविडेंड यानी की कंपनी के मुनाफे का कुछ प्रतिशत अपने शेयर धारकों में बाटना। अब डिविडेंड देना और उसका प्रतिशत तय करने का कोई नियम नहीं है, इसका पूरा फैसला कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर ही करते है। 

इसके साथ अगर आप किसी डिविडेंड शेयर में निवेश करते है तो आपको एक्स-डिविडेंड डेट से पहले उसमे निवेश करना होता है। इसका पूरा विवरण आगे दिया गया है।

ज़्यादातर डिविडेंड कैश में दिया जाता है लेकिन कुछ कम्पनीज शेयर्स के रूप में भी डिविडेंड देती है। अब डिविडेंड में भी अलग-अलग प्रकार होते है जिसके बारे में आगे बताया गया है।

Dividend Example in Hindi

शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले और बाद में आपको अलग-अलग कैलकुलेशन करनी होती है जिसके लिए शेयर मार्केट का गणित की जानकारी होना काफी ज़रूरी हो जाता है

यहाँ पर अगर हम डिविडेंड की बात करें तो डिविडेंड को शेयर के फेस वैल्यू में हुए प्रतिशत वृद्धि के तौर पर देखा जाता है। इसको किस तरह से कैलकुलेट किया जाता है उसके लिए मान लेते है कि कंपनी द्वारा जारी किए गए शेयर का फेस वैल्यू 8 रुपये प्रति शेयर था।

यदि कंपनी ने साल के अंत में 46 रुयये प्रति शेयर के हिसाब से अपने शेयरधारकों को Dividend दिया तो इसका मतलब हुआ की एक शेयर के प्राइस के हिसाब से 38 रुपये का लाभ हुआ। यदि हम इस वृद्धि को प्रतिशत के तौर पर देखें तो कंपनी ने 474 प्रतिशत का Dividend दिया।  

प्रति शेयर के प्राइस में आई वृद्धि= 38
प्रतिशत के तौर पर यह वृद्धि = 38/8*100
                                            =475%


Type of Dividend in Hindi

कंपनी अपने शेयरधारकों को अलग-अलग फॉर्म में डिविडेंड देती है। डिविडेंड किस फॉर्म में दिया जाएगा इस बात का फैसला घोषणा पर निर्भर करता है कि यह घोषणा साल में कितनी बार की गई है। मुख्य रुप से दो तरह के डिविडेंड दिए जाते हैं।

  1. स्पेशल डिविडेंड– यह समान्य शेयर पर दी जाने वाली डिविडेंड का एक प्रकार है। कंपनी द्वारा ये डिविडेंड ऐसे मौकों पर दी जाती है जब कंपनी को लगातार कुछ सालों से फायदा हो रहा हो या कंपनी के पास काफी मात्रा में नगद मौजूद हो। 
  2. प्रीफर्ड डिविडेंड– यह डिविडेंड कुछ खास शेयर धारकों के लिए होता है। इस प्रकार का डिविडेंड समान्यतौर पर तीन महीने में एक बार दिया जाता है। इस तरह के डिविडेंड समान्यत: ऐसे शेयर पर दिया जाता है जो बॉन्ड की तरह होते है।

इसके अलावा भी कई तरह के डिविडेंड कंपनी के द्वारा शेयरधारकों को दिए जाते हैं।

  • नगद के रूप में-  ज्यादातर कंपनियां नगद के रूप में Dividend देना पसंद करते हैं। कभी-कभी यह चेक के रूप में भी हो सकता है।
  • संपत्ति के रूप में-  कुछ कंपनिया संपत्ति के रूप में भी अपने शेयरधारकों को Dividend देती है।  ये रियल एस्टेट और इन्वेस्टमेंट सिक्योरिटी के रूप में हो सकती है।
  • स्टॉक के रूप में- कुछ कंपनियां Dividend के रूप में अपने शेयरधारकों को शेयर देती है। ये कंपनी द्वारा इश्यू किए गए नए शेयर होते हैं।

Dividend पॉलिसी क्या है?

हर कंपनी एक पॉलिसी के तहत डिविडेंड देने का निर्णय लेती है कि वो अपने शेयरधारकों को किस रूप में डिविडेंड देगी। हालांकि ज्यादातर मार्केट एक्सपर्ट्स ये मानते हैं कि डिविडेंट पॉलिसी हर कंपनी का अंदरुनी मामला होता है।

डिविडेंड पॉलिसी मुख्यरुप से तीन तरह की होती है।

  1. स्टेबल डिविडेंड पॉलिसी– इस तरह की पॉलिसी के तहत कंपनी द्वारा दिया जाने वाला  डिविडेंड समान्यतौर पर पूर्वनियोजित होता है। इस पॉलिसी के तहत शेयरधारकों को डिविडेंड मिलता है चाहे कंपनी फायदे में हो या नहीं।
  2. कांस्टेंट डिविडेंड पॉलिसी-  कांस्टेंट डिविडेंट की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके तहत कंपनी लाभ के परसेंटेज के अनुसार डिविडेंड देती है। इसका          सीधा मतलब है कि कंपनी को ज्यादा फायदा तो शेयरधारकों को मिलने वाला डिविडेंड भी बढ़ जाता है। स्टेबल डिविडेंट पॉलिसी में ऐसा नहीं होता है।
  3. री-शिड्यूल डिविडेंड पॉलिसी– इस पॉलिसी को भी शेयरधारकों के लिए फायदेमंद नहीं कहा जा सकता है। इस पॉलिसी वोलैटिलिटी(उतार-चढ़ाव) ज्यादा होती है। इसमें कंपनी पहले अपने लाभ को कंपनी की इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगाता है उसके बाद बचे पैसों को डिविडेंड के रूप में देता है।

डिविडेंड देने वाली कंपनियां इन तीनों में से किसी एक पॉलिसी को चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। कंपनियां अपने सुविधानुसार निर्णय लेती है कि वो किस पॉलिसी का अनुसरण कर डिविडेंट देगी।


Important Dividend Dates in Hindi

अब जैसे की हमने पहले उल्लेख किया है कि कंपनी में डिविडेंड प्राप्त करने के लिए आपको ex-dividend डेट से पहले उस कंपनी के शेयर खरीदने होंगे। इसके अलावा डिविडेंड के साथ और भी अन्य तारीख जुड़ी होती है जैसे की:

     1.अनाउंसमेंट डेट

कंपनी सालाना आम बैठक में जिस दिन Dividend देने का एलान करती है वो तारीख अनाउंसमेंट डेट कहलाती है। इसमें शेयरधारकों की स्वीकृति भी अनिवार्य होती है।

  1. एक्स डिविडेंड डेट

यह उस तारीख को बताती है जब Dividend पाने की योग्यता खत्म हो जाती है। Dividend के लिहाज से यह सबसे महत्वपूर्ण तारीख होती है जिससे शेयरधारकों की Dividend पाने की योग्यता का निर्णय किया जाता है। 

इस तारीख में या फिर इसके बाद शेयर खरीदने वाले शेयरधारक Dividend पाने के योग्य नहीं होते हैं। Dividend हमेशा ऐसे शेयरधारकों को मिलता है जो  एक्स डिविडेंड डेट के एक दिन पहले कारोबार वाले दिन शेयर खरीदते हैं।

इसे एक उदाहरण के साथ समझ सकते हैं। माना कंपनी द्वारा एक्स डिविडेंट डेट 27 दिसंबर, सोमवार को तय की गई है। इस स्थिति में केवल वही शेयरधारक डिविडेंड के पात्र होंगे जिन्होंने शेयर 24 दिसंबर को खरीदे हैं। 

यहां हमने एक्स डिविडेंट के एक दिन पहले का जिक्र किया था जोकि 26 दिसंबर था लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि एक दिन पहले कारोबार वाले दिन की बात की गई थी जोकि 24 दिसंबर था। इसलिए केवल उस दिन शेयर खरीदने वाले शेयरधारक Dividend पाने के हकदार होंगे।

  1. रिकॉर्ड डेट

ये वो तारीख होती है जिस दिन यह तय किया जाता है कि किस-किस शेयरधारकों को Dividend बांटा जाएगा। समान्य तौर पर अनाउंसमेंट डेट और इस तारीख के बीच 30 दिनों का फासला होता है। इस दौरान कंपनियां उन शेयरधारकों को अलग करती है जो Dividend पाने के हकदार नहीं हैं।

       4.पेमेंट डेट

यह वो तारीख होती है जिस दिन कंपनी डिविडेंड निवेशकों के खातों में क्रेडिट करती है। 

इन चार तारीखों का इंतजार शेयरधारकों को बड़ी बेसब्री से होता है, क्योंकि डिविडेंड उस पुरस्कार की तरह होता है जो शेयरधारकों को निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है। आइए कुछ कंपनियों के बारे में जानते हैं जिन्होंने साल 2021 में सबसे ज्यादा डिविडेंड दिया।


डिविडेंड देने वाली कंपनी

अब क्योंकि डिविडेंड कंपनी के ग्रोथ और मुनाफे के साथ जुड़ा है तो यहाँ पर वही कंपनी डिविडेंड देने का निर्णय देने का ऐलान करती है जो ज़्यादा तेज़ी से आगे बड़ी हो। यहाँ पर अगर हम कुछ कंपनी को देखे तो निम्नलिखित सेक्टर की कंपनियों ने लगातार डिविडेंड देकर अपने शेयरधारको के मुनाफे को बढ़ाया है:

  • आयल एंड गैस
  • बैंक्स एंड फाइनेंसियल कंपनी
  • हेल्थकेयर और फार्मा
  • यूटिलिटीज
इसके अलावा रियल-एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) और मास्टर लिमिटेड पार्टनरशिप (MLP) से जुड़ी  कंपनी भी डिविडेंड देने के लिए जानी जाती है
जो कंपनी अपने ग्रोथ की शुरूआती दौर में है जैसे की बायोटेक कंपनी रेगुलर डिविडेंड नहीं देती है। इसके कई कारण है जैसे कि :
  • ऐसे कंपनी में लागत का खर्चा ज़्यादा होता है
  • बिज़नेस ग्रोथ और ऑपरेशन में इनका ज़्यादा खर्चा होना
इन्ही कारणों की वजह से इन कंपनी में फण्ड की कमी रहती है जिसकी वजह से ये अपने शेयरधारको को डिविडेंड देने में असमर्थ रहती हैइसके साथ मिड-ग्रोथ कंपनी भी डिविडेंड देने में पीछे रहती है और कंपनी के मुनाफे को उसी के ग्रोथ में लगाने में ज़्यादा केंद्रित रहती है
तो यहाँ पर ये माना जा सकता है कि जो कंपनी बड़ी है और काफी लम्बे समय से ग्रो कर रही है वह डिविडेंड देने में हमेशा आगे रहती है

डिविडेंड देने वाले शेयर 2021

ऐसी कंपनियां जो बड़ी और मार्केट में अपना एक नाम बना चुकी हैं वही कंपनियां अपने शेयरधारकों को डिविडेंड देती हैं। 2021 में जिन कंपनियों ने सबसे ज़्यादा डिविडेंड दिया है उसका उल्लेख नीचे टेबल में किया गया है:

NSE में निफ़्टी ५० के साथ टॉप 155 कंपनियां जिसमें ऊपर दी गई कंपनियां भी शामिल हैं ने कोरोना काल के बावजूद अपने शेयरधारकों को अच्छा खासा डिविडेंड दिया। अब सवाल उठता है कि कंपनियां डिविडेंड क्यों देती है और इसके माध्यम से वो अपने निवेशकों को क्या संदेश देना चाहती है?


कंपनियां डिविडेंड क्यों देती है?

कंपनियां अपने सालाना लाभ के कुछ हिस्सों को अपने शेयरहोलडर्स में बांटती है इसके पीछे कई कारण होते हैं। 

  • कंपनी के ग्रोथ रेट और फ्यूचर प्लान में कमी के कारण

जब कंपनी को लगता है कि उसके पास कंपनी की ग्रोथ रेट को बढ़ाने के लिए उनके पास कोई विकल्प मौजूद नहीं है। इतना ही निकट भविष्य में उस कंपनी में नए निवेश के विकल्प भी नजर नहीं आ रहे हैं तो ऐसी हालात में वे अपने शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड देते हैं जो शेयरहोल्डर्स के लिए एक प्रोत्साहन का काम करती है। 

  • कैश फ्लो में लगातार बढ़ोतरी

कभी-कभी कंपनी के पास लाभ के रूप में कैश फ्लो अधिक हो जाता है जिसे कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स के बीच डिविडेंड के रूप में बांट देता है।

  • निवेशकों को आकर्षित करने के लिए

कुछ कंपनियां शेयरधारकों का कंपनी के प्रति भरोसा बढ़ाने के लिए Dividend बांटती हैं। यह कंपनी की छवि को भी सुधारती हैं।

ज्यादा Dividend कंपनी के बारे में निवेशकों के बीच यह संदेश पहुंचाने के लिए काफी होती है कि कंपनी लगातार अच्छा कर रही है। इससे निवेशक भविष्य में बिना किसी डर के कंपनी में निवेश करने के लिए तैयार होते हैं।


शेयर प्राइस पर Dividend का प्रभाव

Dividend देने का मतलब होता है कि वह पैसा कंपनी के खाते से हमेशा के लिए बाहर हो गया इसलिए इसका सीधा असर कंपनी के शेयर प्राइस पर भी पड़ता है। ये प्राइस Dividend अनाउंसमेंट के दिन बढ़ सकता है और एक्स डिविडेंड डेट के दिन घट सकता है।

उदाहरण के लिए यदि किसी शेयर का प्राइस 340 रुपये प्रति शेयर हो और कंपनी ने 5 रुपये Dividend देने का एलान किया हो। इस स्थिति में डिविडेंट अनाउंसमेंट के दिन यह 345 को हो सकता है जबकि इसके उलट एक्स डिविडेंड डेट के दिन यह प्राइस 335 का हो जाएगा क्योंकि कंपनी से यह पैसा हमेशा के लिए निकलने वाला होता है।


निष्कर्ष

कंपनियां हर साल अपने मुनाफे में से कुछ हिस्से शेयरधारकों में बांटती है। शेयरधारकों को मिलने वाले Dividend का फैसला पूरी तरह से कंपनी के हाथ में होता है। वो जब चाहे, जितना चाहे Dividend दे सकती है। ऐसा करने से निवेशकों का भरोसा कंपनी के प्रति बढ़ता है और वो भविष्य में निवेश करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

शेयर बाजार में निवेश करना आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है लेकिन ज़रूरी है कि आप पूरी जानकारी और समझ के साथ ही निवेश करें

इसके लिए आप लिए कुछ किताबों का अध्ययन कर सकते है या शेयर मार्केट कोर्स ले सकते अपने ज्ञान को बढ़ा सकते है

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