Square Off Meaning in Hindi

बहुत से लोग स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करते है लेकिन कुछ ही लोग है जो इसकी बारीकियों को समझते है, ट्रेडिंग में बहुत से शब्दो का इस्तेमाल किया जाता है जिनमें सबसे ज्यादा उपयोग में होने बाला एक शब्द है स्क्वायर ऑफ। तो आइये जानते है square off meaning in hindi.

स्क्वायर ऑफ क्या होता है? 

स्क्वायर ऑफ ट्रेड से बाहर निकलने की एक प्रक्रिया है जिसे इंट्राडे ट्रेडर मार्केट की वोलेटिलिटी (volatility) से होने वाले उतार–चढाव से लाभ कमाने के लिए उपयोग करते हैं। 

स्क्वायर ऑफ ट्रेडर के नजरिए से एक सेटेलमेंट शैली है, जहां एक ट्रेडर द्वारा खरीदे गए सभी शेयरों को पूरी तरह से बेच दिया जाता है। इंट्राडे ट्रेडिंग सत्र में स्क्वायर ऑफ अनिवार्य होता है, ताकि यदि ट्रेडर स्वयं अपनी होल्डिंग पोजीशन को बंद नहीं करते हैं, तो अधिकांश स्टॉक ब्रोकर स्वचालित रूप से दोपहर 3:15 बजे से दोपहर 3:20 बजे के बीच, ट्रेडों को बंद कर देते हैं।

स्क्वायर-ऑफ का उद्देश्य होल्डिंग ट्रेडों को पूरा करना है। इसका मतलब यह है कि आपके द्वारा सुबह खरीदा या बेचा गया कोई भी इंट्राडे ट्रेड स्टॉक मार्केट बंद होने से पहले बेचा या वापस खरीदा जाना चाहिए।

उदाहरण,

मान लीजिए ट्रेडर X 500 रुपये प्रति शेयर प्राइस पर SBI के 100 स्टॉक खरीदने के लिए ट्रेडिंग प्लेटफार्म का उपयोग करता है और ये उम्मीद करता है कि 505 पर प्राइस जाने पर वह ट्रेड को स्क्वायर-ऑफ कर देगा।

अगर ट्रेडर X इंट्राडे ट्रेडिंग टाइम यानी की 3:15 से पहले अपनी पोजिशन को स्क्वायर-ऑफ नही करता है तो ब्रोकर स्वचालित रूप से ट्रेड को ऑटो स्क्वायर-ऑफ कर देगा।


पोजिशन को स्क्वायर ऑफ कैसे करें?

ट्रेडिंग में, किसी मौजूदा पोजिशन को स्क्वायर-ऑफ करना बहुत आसान है ये आप अपने स्टॉक ब्रोकर के ऐप या प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी पोजिशन पर जाकर उसे स्क्वायर-ऑफ कर सकते है।

जैसे मान लीजिए आपने बैंक निफ्टी फ्यूचर को खरीदा है और कुछ समय बाद बैंक निफ्टी आपकी दिशा में चला गया है और अब आप प्रॉफिट बुक करना चाहते है तो अपनी पोजिशन पर जाकर सैल पर क्लिक करे, फिर आपके सामने एक विंडो खुल जायेगी, जिसमें आप चाहे तो मार्केट प्राइस पर सेल कर सकते है या खुद प्राइस डाल कर उस प्राइस तक बैंक निफ्टी के आने का इंतजार कर सकते है। 


स्क्वायर-ऑफ टाइमिंग

ट्रेडिंग में Square off Meaning in Hindi को समझने के बाद आइए इसके लिए भारतीय स्टॉक मार्केट की स्क्वायर-ऑफ समय सीमा पर एक नजर डालते हैं। 

दोपहर 03:15 बजे से 03:20 बजे के बीच, अधिकांश ब्रोकर द्वारा सभी स्टॉक और एफ एंड ओ होल्डिंग्स को स्क्वायर-ऑफ कर दिया जाता है। 

जबकि करेंसी फ्यूचर्स का स्क्वायर-ऑफ टाइम शाम 4:45 बजे से शाम 4:50 बजे तक होता है। 

इसके अलावा MCX का स्क्वायर-ऑफ टाइम मार्केट बंद होने से 30 मिनट पहले होता है। MCX के लिए स्क्वायर-ऑफ का समय लगभग 10:35 बजे और रात 11:20 बजे होता है। 


ऑटो स्क्वायर ऑफ चार्ज क्या है? 

यदि ब्रोकर आपकी ओपन  पोजीशन को ऑटो स्क्वायर-ऑफ करता है, तो ऑटो स्क्वायर-ऑफ कॉस्ट के रूप में प्रत्येक ऑर्डर के लिए ब्रोकर आपको 20 से 50 रुपये (प्लस 18 प्रतिशत GST) का जुर्माना लगाता है। 

तो यहाँ पर ब्रोकरेज के अतिरिक्त आपको स्क्वायर ऑफ चार्ज का भुगतान भी करना होता है जिससे आपका कमाया हुआ मुनाफा कम हो जाता है।

नतीजतन, आपको ऑटो स्क्वायर-ऑफ कॉस्ट को रोकने के लिए समय से पहले अपनी पोजिशन को स्क्वायर-ऑफ करना चाहिए। 


Square Off Meaning in Option Trading

स्टॉक मार्केट में एक ट्रेडर या निवेश को ट्रेड करने के लिए बहुत से रास्ते खुले हुए है जिनमें इंट्राडे ट्रेडिंग, ऑप्शन ट्रेडिंग, फ्युचर ट्रेडिंग, पोजिशनल ट्रेडिंग आदि शामिल है, अभी तक हम square off meaning in hindi के बारे में समझ गए है लेकिन अभी हम ये देखते है कि स्क्वायर ऑफ ऑप्शन ट्रेडिंग में कैसे काम करता है।

ऑप्शन ट्रेडिंग में किसी भी स्टॉक या इंडेक्स में जब हम ट्रेड करते है तो हमें स्ट्राईक प्राइस, एक्सपायरी आदि चुननी होती है।

यानि की आप जो भी एक्सपायरी चुनेंगे आपको उस एक्सपायरी तिथि से पहले अपनी पोजिशन को Square Off करना होगा, नही तो वह पोजिशन खुद ब खुद Square Off  हो जायेगी। जैसे कि हमने ऊपर ऊपर बताया है, अब इसे आसान शब्दों में समझते है.

मान लीजिये बैंक निफ्टी अभी 33500 पर चल रहा है और आपको लगता कि अगले महीने के अंत से पहले बैंक निफ्टी 35000 तक जा सकता है। इस स्थिती में आप 35000 का कॉल ऑप्शन अगले महिने की एक्सपायरी के लिए खरीद लेते है। 

अभी आपकी पोजिशन की एक्सपायरी नजदीक है और बैंक निफ्टी 34000 पर है लेकिन आपने 35000 तक जाने की उम्मीद की थी।

इस स्थिती में आपको अपनी पोजिशन को एक्सपायरी से पहले Square Off करना होगा, नही तो आपके ऑप्शन की वैल्यु जीरो हो जायेगी। क्योंकि ऑप्शन एक्सपायरी के जितने नजदीक जायेगा उतनी ही तेजी से ऑप्शन की वैल्यु कम होती जायेगी।

नोट – ऑप्शन ट्रेडिंग में Weekly और Monthly एक्सपायरी होती है आप जिस भी एक्सपायरी को ट्रेड करने के लिए चुनते है आपको उस एक्सपायरी तिथि से पहले अपनी पोजिशन को Square Off करना होता है, फिर चाहे बह Weekly एक्सपायरी हो या फिर Monthly एक्सपायरी हो।


Square Off Meaning in Future Trading

एक हद तक फ्युचर और ऑप्शन की ट्रेडिंग प्रकिया समान होती है जैसे हम ऑप्शन खरीदने के एक निश्चित तिथि का चयन करते है ठीक इसी प्रकार फ्युचर ट्रेडिंग में भी हमें एक्सपायरी का चयन करना होता है। वस फर्क इतना है कि हमें फ्युचर ट्रेडिंग में स्ट्राईक प्राइस को चुनने की जरुरत नही पडती है।

फ्युचर ट्रेडिंग में आप अधिकतम तीन महीने के लिए फ्युचर कॉन्ट्रेट खरीद सकते है, इससे में भी एक्सपायरी तिथि से पहले आपको अपनी पोजिशन को Square Off करना होता है। इसे  एक उदाहरण की मदद से समझते है। 

मान लिजिए बैंक निफ्टी अभी 33700 पर चल रहा है और आपको लगता कि महीने के अंत से पहले बैंक निफ्टी 34000 तक जा सकता है। तव इस स्थिती में आप वर्तमान महीने की एक्सपायरी के साथ बैंक निफ्टी फ्युचर खरीद सकते है।

अव माना महीने के अंत में बैंक निफ्टी का प्राइस 33900 है तव आपको जो भी प्रॉफिट मिल रहा है उसे लेकर अपनी पोजिशन को Square Off कर सकते है, वही दूसरी तरफ अगर महीने के अंत में बैंक निफ्टी का प्राइस 33500 है तो इस स्थिती में आपको जितना भी नुकसान हो रहा है उससे के साथ अपनी पोजिशन को Square Off करना होगा।


निष्कर्ष

इंट्राडे ट्रेडिंग करते समय, आपको समय का विशेष ध्यान देना है। अगर आप इंट्राडे ट्रेडिंग कर रहे है तो सुनिश्चित करे कि ऑटो स्क्वायर-ऑफ समय से पहले अपनी पोजिशन को स्क्वायर-ऑफ करे, जिससे कि ब्रोकर की पैनल्टी से बच सके।

शेयर मार्केट में निवेश करने हेतु आपको अलग-अलग टर्म से अवगत होना काफी आवश्यक है जिसके लिए आप हमारे द्वारा प्रदान ऑनलाइन स्टॉक मार्केट कोर्स ले सकते है।

 

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