IV in Option Chain in Hindi

iv in option chain in hindi

ऑप्शन ट्रेडिंग में कई कारक जैसे की time decay, ओपन इंटरेस्ट, प्रीमियम की गणना और ट्रेडर की आक्रमकता को जानने में उपयोगी होते है। इन्ही सब कारको के साथ एक कारक इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी यानी की IV का भी होता है। लेकिन ऑप्शन चैन में IV क्या होता है और ये किस बात की जानकारी प्रदान करता है, आज इस लेख में इन सभी सवालो के उत्तर आपको प्राप्त होंगे।

Implied Volatility Meaning in Hindi

स्टॉक मार्केट में ट्रेड करते समय आपने अक्सर वोलैटिलिटी के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या कभी आपने जाना है की ये वोलैटिलिटी क्या होती है?

वोलैटिलिटी का अर्थ है अस्थिरता, यानी की कितनी तेज़ी से स्टॉक प्राइस ऊपर या नीचे गिर सकता है। उदाहरण के लिए अगर किसी शेयर की कीमत 100 रुपये है और उसकी वोलैटिलिटी 3% है तो इसका मतलब वह शेयर की वैल्यू 97-103 तक हो सकती है।

अब इस वोलैटिलिटी की गणना पिछले डाटा के अनुसार की जाती है, लेकिन अगर आपको आने वाली मार्केट की वोलैटिलिटी की जानकारी लेनी है तो उसके लिए इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी का उपयोग किया जाता है। अब क्योंकि फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग में हम आज की पोजीशन को आने वाले समय में सेटल करते है तो उसके लिए IV यानी की इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी की जानकारी लेना बहुत ज़रूरी हो जाता है।

तो अगर निफ्टी 18000 पर ट्रेड कर रहा है और एटीएम स्ट्राइक मूल्य का IV 10% है, तो इसका मतलब है कि इंडेक्स की वैल्यू सालाना 16800-19200 की सीमा में घूम सकता है। इससे एक ट्रेडर को ट्रेडिंग रेंज निर्धारित करने में मदद मिलती है।

तो अब यहाँ पर प्रश्न आता है कि ये जानकारी एक साप्तहिक या मासिक एक्सपायरी वाले ऑप्शन ट्रेडर के लिए किस तरह लाभदायक है

यदि इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी बढ़ती है, तो इससे ऑप्शन का  प्रीमियम भी बढ़ जाता है, भले ही ऑप्शन का प्रकार (कॉल या पुट) कुछ भी हो। इसके पीछे कारण यह है कि सेलर  यह सोचकर प्रीमियम तय करता है कि यह आउट-ऑफ़-द-मनी (OTM) में एक्सपायर हो जाएगा और यदि अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका मतलब है कि मूल्य में उतार-चढ़ाव अधिक हो सकता है और ऑप्शन का इन-द-मनी एक्सपायर होने की सम्भावना बढ़ जाएगी जिसकी वजह से सेलर का जोखिम बढ़ता है, और यही कारण है की ऑप्शन का प्रीमियम ज़्यादा हो जाता है। 

ऑप्शन चेन (what is option chain in hindi) में हर स्ट्राइक प्राइस के IV की जानकारी दी जाती है

इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी के बढ़ने या घटने का प्रीमियम पर कितना असर होगा उसके लिए ऑप्शन ग्रीक, वेगा का उपयोग किया जाता है


What is Vega in Option in Hindi?

Vega एक ऑप्शन ग्रीक है जो ऑप्शन प्रीमियम पर इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी की संवेदनशीलता को मापता है।

iv in options

शेयर मार्केट का गणित का उपयोग कर अगर इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी (IV) के प्रभाव की गणना लास्ट ट्रेडेड प्राइस (LTP in option chain in hindi) पर की जाए तो उसके लिए VEGA का इस्तेमाल किया जाता है जो एक  ट्रेडर को बताता है कि 1% IV के बदलाव से प्रीमियम कितना बढ़ेगा या घटेगा। 

उदाहरण के लिए, यदि एटीएम विकल्प के लिए वेगा 10 है। मान लेते है की किसी कारण Nifty की इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी 10% से 12% तक बदलती है।

अब क्योंकि इस स्ट्राइक प्राइस का वेगा 10 है, यानी की 1% इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी के बढ़ने पर प्रीमियम 10 रुपये बढ़ जाएगा। यह पर इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी 2% बढ़ी तो इस स्थिति में ऑप्शन प्रीमियम का मूल्य ₹20 से बदल जाएगा। 

एक अन्य मामले में यदि इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी 2% कम हो जाती है तो ऑप्शन प्रीमियम मूल्य में ₹20 की गिरावट आती है। यह गणना कॉल और पुट दोनों विकल्पों के लिए समान है।

यहाँ पर आपको बता दे की एक तरफ इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी ATM ऑप्शन के लिए सबसे कम होती है और वही ITM और OTM ऑप्शन के लिए बढ़ती जाती है, दूसरी तरफ Vega की बात की जाए तो ATM ऑप्शन के लिए VEGA सबसे ज़्यादा होता है और deep ITM और OTM के लिए इसकी वैल्यू बढ़ती जाती है

इसके साथ अगर एक्सपाइरी की बात की जाए तो वोलैटिलिटी के बदलाव का प्रभाव उन ऑप्शन में ज़्यादा देखने को मिलता है जिसकी एक्सपाइरी दूर होती है, इसका मतलब उन ऑप्शन का VEGA ज़्यादा होता है

vega in options


ऑप्शन में IV क्यों बदलता है?

इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी के बढ़ने या घटने के पीछे कई तरह के कारक है, जैसे की:

  1. GDP में बदलाव, ब्याज दरें आदि जैसी आर्थिक स्थितियां

  2. राजनीतिक घटनाएँ, चुनाव और भूराजनीतिक बैठकें 

  3. सेक्टर समाचार अंतर्निहित अस्थिरता को भी बढ़ाता है

  4. बाज़ार में हेरफेर, जैसे इनसाइडर ट्रेडिंग और अतिरिक्त अवैध तरीके, रातों-रात बाज़ार को बदल सकते हैं।

  5. किसी विशिष्ट परिसंपत्ति की आपूर्ति और मांग में भारी बदलाव भी बाजार को अस्थिर बना सकता है।

ऐसी स्थितियों जिन ऑप्शन ट्रेडर्स ने पोजीशन होल्ड की होती है उन्हें प्रीमियम मूल्य में वृद्धि से लाभ होता है, हालांकि, इसके विपरीत ऑप्शन सेलर को आईवी में वृद्धि के साथ पैसा खोना पड़ता है।

IV में वृद्धि से ऑप्शन ट्रेडिंग मार्जिन का मूल्य भी बदल जाता है, और इसलिए एक सेलर को नियमित अंतराल पर एक्सपोज़र मार्जिन की जांच करने की आवश्यकता होती है।

इसके अलावा, IV में वृद्धि के साथ, विक्रेताओं का जोखिम बढ़ जाता है और इसलिए नए खरीदारों को उच्च कीमतों पर ऑप्शन मिलता है।


Advantages of IV in Option Chain in Hindi 

ऑप्शन ट्रेडिंग में लाभ कमाने के लिए, इम्प्लॉइड वोलैटिलिटी की अवधारणा और विकल्पों में इसके महत्व को समझना महत्वपूर्ण है। ऑप्शन ट्रेडिंग में IV की भूमिका इस प्रकार है:

  • IV आपको बाज़ार की अनिश्चितता और भावना का पता लगाने में मदद कर सकता है।
  • ऑप्शन के सेलर इसका उपयोग प्रीमियम निर्धारित करने के लिए कर सकते हैं।
  • आप इसका उपयोग अपनी ट्रेडिंग रणनीति को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कर सकते हैं।

Disadvantages of IV in Option Chain in Hindi 

फ़ायदों के साथ-साथ, विकल्प ट्रेडिंग में IV डेटा के कुछ नुकसान भी यहां दिए गए हैं:

  • यह पूरी तरह से परिसंपत्ति की कीमत पर आधारित है न कि किसी अन्य बुनियादी बातों पर।
  • अंतर्निहित अस्थिरता समाचार या प्रमुख वैश्विक घटनाओं के साथ बदल सकती है।
  • यह निश्चित रूप से भविष्यवाणी करता है कि कीमत आगे बढ़ेगी लेकिन दिशा नहीं बताती है, इसके लिए आपको अन्य कारकों का भी विश्लेषण करना होता है।

निष्कर्ष

ऑप्शन चैन में IV का उपयोग बेहतर ट्रेडिंग निर्णय लेने के लिए किया जा सकता है, लेकिन आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि शेयर बाजार की दुनिया में कुछ भी 100% गारंटीकृत नहीं है।

इसी तरह, IV आपको सूचित कर सकता है कि बाज़ार अस्थिर हो सकता है लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है। यदि आप जानना चाहते हैं कि ऑप्शन चैन क्या संकेत देती हैं और उनसे अधिकतम लाभ कैसे प्राप्त करें, तो आप हमारे शेयर बाजार पाठ्यक्रमों में नामांकन कर सकते हैं। हम सबसे सरल तरीकों से शेयर बाजार का ज्ञान प्रदान करते हैं।

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