Intraday Trading Strategy in Hindi

इंट्राडे ट्रेडिंग शेयर मार्केट में पैसा लगाने का एक जोखिम भरा तरीका है और शेयर बाजार में निवेशक जो करते हैं उससे विल्कुल अलग है। इंट्राडे ट्रेडिंग में एक शुरुआत के रूप में, किसी भी प्रकार के नुकसान से बचने और कम समय में सही लाभ हासिल करने के लिए बुनियादी ज्ञान और सही रणनीतियों को समझना महत्वपूर्ण है। इस बीच, इंट्राडे ट्रेडिंग में शुरुआती लोगों के लिए एक सलाह है कि ट्रेडिंग में सिर्फ उतना ही पैसा लेकर आए जितना की आप नुकसान झेल सकते है। 

इस लेख में, हम शुरुआती लोगों के लिए 6 Best Intraday Trading Strategy in Hindi में  कवर करने जा रहे हैं। आएँ शुरू करें।

इंट्राडे ट्रेडिंग में, शेयर बाजार की रणनीतियां और बुनियादी ज्ञान को एक ट्रेडर या निवेशक कितनी अच्छी तरह उपयोग करता है, इसके आधार पर उसके लाभ और नुकसान होते है।

इंट्राडे ट्रेडिंग से तात्पर्य वित्तीय लाभ के लिए एक ही दिन में स्टॉक खरीदने और बेचने से है। दूसरे शब्दों में, लाभ कमाने के लिए बाजार बंद होने से पहले व्यक्ति अपनी पोजिशन को बंद कर देते हैं। 

निवेश की तुलना में इंट्राडे ट्रेडिंग जोकिम भरी है इसलिए, आपको अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक विवेकपूर्ण इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीति को अपनाना चाहिए।

यहां कुछ ट्रेडिंग रणनीतियां दी गई हैं जिन्हें आप अपनी ट्रेडिंग में आजमा सकते हैं।


Intraday Trading in Hindi

जैसा कि नाम से पता चलता है, इंट्राडे का मतलव है उसी दिन शेयर को खरीदने या बेंचने का प्रोसेस। इसी तरह, इंट्राडे ट्रेडिंग ट्रेडिंग का एक रूप है, जिसमें शेयरों की खरीद और बिक्री एक ही ट्रेडिंग सत्र के भीतर पूरी की जाती है।

इंट्राडे ट्रेडिंग में ट्रेडर्स के बीच शेयरों को खरीदा व बेंचा जाता है इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए सही ज्ञान की आवश्यकता होती है इसलिए नए लोगो को इंट्राडे ट्रेडिंग में सीख कर ही आना चाहिए।

यह बहुत से लोगों के बीच एक सामान्य मिथक है, कि इंट्राडे ट्रेडिंग पूरे दिन खरीदने और बेचने के बारे में है और व्यक्ति को हर समय स्क्रीन के सामने रहना पड़ता है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि इंट्राडे ट्रेडिंग में निवेश या डिलीवरी आधारित ट्रेडिंग की तुलना में अधिक ध्यान और ध्यान देने की आवश्यकता होती है। इंट्राडे ट्रेडर को भी अपनी ट्रेड प्लान करने से पहले बहुत प्लानिंग करनी होती है ताकि बह कम जोकिम के साथ अच्छा लाभ कर सके।

ट्रेडर्स के दिन का लगभग 85-90% समय ट्रेड के अवसरों के विश्लेषण और नियोजन में चला जाता है, और शेष 10-15% समय ट्रेड Execution में जाता है।


Best Intraday Trading Strategy in Hindi

अब, इंट्राडे ट्रेडिंग की मूल बातें समझने के बाद, इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए शेयरों का चयन करते समय विभिन्न पहलूओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। एक बात जो आपको हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए, वह यह है कि ये रणनीतियाँ पैसा कमाने की गारंटी नहीं देती हैं।

ये आपके माइंडसेट और मनी मैंनेजमेंट पर निर्भर करता है कि आप इन रणनीतियों से पैसा कमा पायेंगे या नही। आइए कुछ इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीतियों को समझने की कोशिश करें:

1. मोमेंटम स्ट्रेटजी

इस प्रकार, इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे स्टॉक के बारे में ऐसी खबरों का अध्ययन करें जो उनकी वॉचलिस्ट में हैं और तदनुसार खरीद या बिक्री के ऑर्डर दें। चूंकि शेयर की कीमतों में विभिन्न बाहरी कारकों के कारण उतार-चढ़ाव होता है, इंट्राडे ट्रेडर्स को लाभ कमाने के लिए बहुत जल्द निर्णय लेने चाहिए। 

शेयर मार्केट में कहा जाता है कि “Trend is your Friend” ये कहावत मोमेंटम स्ट्रेटजी के लिए विल्कुल फिट बैठती है। मोमेंटम स्ट्रेटजी स्ट्रेटजी में सही ट्रेड को पहचान कर उसके मोमेंटम से लाभ कमाने का एक तरीका है। 

जैसा कि नाम से पता चलता है, इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए इस स्ट्रेटजी का आधार शेयर बाजार में गति(momentum) का अधिकतम लाभ उठाना है। इसमें बाजार की प्रवृत्ति में महत्वपूर्ण बदलाव से पहले सही स्टॉक को ट्रैक करना शामिल है। बाजार के रुझान में महत्वपूर्ण बदलाव को परखने से पहले और उसके अनुसार ट्रेडर्स ट्रेड करने से पहले सही स्टॉक चुनते हैं। 

एक इंट्राडे ट्रेडर की भूमिका शेयर बाजार में ट्रेड के लिए उपलब्ध होने से पहले स्टॉक का चुनाव ताजा खबरों, अधिग्रहण की घोषणा, तिमाही आय आदि खबरों का अध्ययन करना है और फिर उसके अनुसार ट्रेड करना है।

एक इंट्राडे ट्रेडर को यह याद रखने की जरूरत है कि शेयर बाजर बाहरी कारकों के आधार पर या तो ऊपर जाएगा या नीचे जाएगा, और इसी बीच बह सही अवसर देखकर अपने ट्रेडिंग निर्णय लेता है। शेयर बाजार की दिशा(Trend) की गति(momentum)  के आधार पर, ट्रेडर मिनटों, घंटों या पूरे दिन के लिए ट्रेड रख सकते हैं।

मोमेंटम ट्रेडिंग रणनीति बहुत अच्छी है, लेकिन इसमें आपको बहुत अलर्ट रहना होगा, जैसे आपको अपनी टेक्निकल एनालिसिस और मार्केट में न्यूज़ के आधार पर लगता कि इस स्टॉक में मोमेंटम आने बाला है, सही समय पर सही निर्णय लेना आवश्यक हो जाता है।


2. ब्रेकआउट स्ट्रेटजी

ट्रेडिंग में, विशेष रूप से इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए टाइमिंग एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारक है। ब्रेकआउट ट्रेडिंग रणनीति में, ट्रेडिंग निर्णय लेते समय “टाइमिंग” एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसमें शेयर मार्केट चार्ट में ब्रेकआउट पॉइंट्स की पहचान करना शामिल है जब स्टॉक की कीमतें ऊपर या नीचे आती हैं, तो ब्रेकआउट ट्रेडर प्राइस को अपने ब्रेकआउट पॉइंट्स तक आने का इंतजार करते है और जैसे ही ब्रेकआउट होता है वह ट्रेड में प्रवेश करते है।

ब्रेकआउट ट्रेंडिंग में यदि कोई शेयर ब्रेकआउट करके ऊपर कीमतों को बढ़ाना जारी रखती है, तो ट्रेडर लॉन्ग पोजीशन पर विचार करते हैं और स्टॉक खरीदते हैं। दूसरी ओर, यदि कीमतें ब्रेकआउट पॉइंट से नीचे आती हैं, तो ट्रेडर शॉर्ट पोजीशन पर विचार करता है या स्टॉक बेचता है।

ब्रेकआउट ट्रेडिंग रणनीति के पीछे मौलिक विचार Processing है, यदि शेयर की कीमतें ब्रेकआउट पॉइंट्स से ऊपर निकल जाती हैं, तो वे अधिक अस्थिर हो जाती है और मोमेंटम जारी रहता है।

जब एक ही दिन शेयरो को खरीदने और बेचने की बात आती है, तो निस्संदेह ब्रेकआउट स्ट्रेटजी सबसे ज्यादा उपयोग की जाती है। इस इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीति में उन शेयरों को ढूंढना शामिल है जो ब्रेकआउट पॉइंट्स से बाहर हो गए हैं जिसमें वे आमतौर पर ट्रेड करते हैं।


3. रिवर्सल ट्रेडिंग स्ट्रेटजी 

रिवर्सल ट्रेडिंग ज्यादा जोखिम भरी ट्रेडिंग रणनीतियों में से एक, रिवर्सल ट्रेडिंग, शुरुआती लोगों के लिए नहीं है। इस रणनीति के अनुसार, ट्रेंड के खिलाफ ट्रेड किया जाता है। अन्य तरीकों की तुलना में, यह इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीति अधिक कठिन है।

इंट्राडे शुरुआती लोगों के लिए इस रणनीति की अत्यधिक अनुशंसा नहीं की जाती है क्योंकि इसके लिए बाजार के बारे में बहुत अधिक अनुभव और ज्ञान की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, यह एक कठिन रणनीति है क्योंकि निवेशकों को कमियों और उनकी ताकत को सही ढंग से पहचानने की जरूरत है।

रिवर्सल ट्रेडिंग रणनीति में सहायक टेक्नीकल इंडीकेटर में से एक डेली पिवोट है जिसका उपयोग इंट्राडे ट्रेडर दैनिक निम्न और उच्च पुलबैक के ट्रेड पर ध्यान केंद्रित करने के लिए करते हैं।


4. स्केल्पिग स्ट्रेटजी

स्केल्पिग ट्रेडिंग स्ट्रेटजी में छोटे – छोटे प्राइस परिवर्तनों से लाभ प्राप्त करना शामिल है। इस पद्धति का उपयोग आमतौर पर इंट्राडे ट्रेडर्स द्वारा शेयरों या इंडेक्स को कुछ सेकेण्ड से कुछ मिनट तक खरीदने या बेचने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, आमतौर पर, उच्च अनुभवी ट्रेडर इस तकनीक का उपयोग करते हैं।

स्केल्पिग ट्रेडर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस मामले में मौलिक या तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis in Hindi) सेटअप की समग्र रूप से अधिक जरुरत नहीं है, बशर्ते आप सही समय पर सही स्टॉक में लाभ कर निकल जाए। ये एक बहुत ही तेज निर्णय चाहने बाली स्ट्रेटजी है इसलिए नए ट्रेडर इसे आजमाने की कोशिश नकरे।

ट्रेडर्स स्टॉक चुनते समय, इस इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीति को चुनने वाले व्यक्तियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे ऐसे शेयरों का चयन करें जो लिक्विड होने के साथ-साथ अस्थिर (volatile) भी हों। इसके अलावा, उन्हें सभी ऑर्डर के लिए स्टॉप लॉस ट्रिगर प्राइस लगाना सुनिश्चित अवश्य करना चाहिए।


5. मूविंग ऐवरेज क्रॉसओवर स्ट्रेटजी

भारत में एक और सफल इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीति मूविंग ऐवरेज क्रॉसओवर स्ट्रेटजी है। जब स्टॉक या इंडेक्स की कीमतें मूविंग ऐवरेज क्रॉसओवर से ऊपर / नीचे चलती हैं, तो यह एक संकेत के रूप में कार्य करता है कि गति में बदलाव है। 

जब शेयर की कीमतें मूविंग ऐवरेज क्रॉसओवर से अधिक हो जाती हैं, तो इसे अपट्रेंड कहा जाता है। जबकि जब स्टॉक की कीमतें मूविंग ऐवरेज क्रॉसओवर से कम होती हैं, तो इसे डाउनट्रेंड कहा जाता है। एक अपट्रेंड के मामले में, ट्रेडर्स को लॉन्ग पोजिशन में प्रवेश करने या स्टॉक खरीदने की सलाह देते हैं। जब कोई डाउनट्रेंड होता है, तो ट्रेडर्स को शॉर्ट पोजीशन में प्रवेश करने हैं या अपने शेयर बेचने का इशारा मिलता हैं।  


6. गैप एंड गो स्ट्रैटेजी

गैप एंड गो स्ट्रैटेजी में ऐसे स्टॉक ढूंढना शामिल है कई बार, ऐसे स्टॉक मिलना आम बात है, जिनमें प्री-मार्केट वॉल्यूम नहीं होता है इन शेयरों की शुरुआती कीमत कल के बंद भाव के संबंध में एक अंतर को प्रदशित करती है।

जब किसी शेयर की कीमत पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस की तुलना में अधिक खुलती है, तो इसे गैप अप कहा जाता है। हालांकि, जब किसी शेयर की कीमत पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस की तुलना में नीचे खुलती है, तो इसे गैप डाउन के रूप में जाना जाता है। ऐसी स्थितियाँ तब उत्पन्न होती हैं जब उस स्टॉक में कोई न्युज हो, तव गेप अप और गेप डाउन होते है।

इस रणनीति को चुनने वाले इंट्राडे ट्रेडर्स ऐसे शेयरों की पहचान करते हैं और उन्हें इस के विश्वास के साथ खरीदते हैं कि क्लोजिंग बेल से पहले गैप बंद हो जाएगा। यह रणनीति उस व्यक्ति के लिए बहुत अच्छी है जो कम और त्वरित लाभ चाहता है लेकिन ज्यादा जोखिम नहीं चाहता।


Intraday Trading Rules in Hindi 

स्ट्रेटेजी के साथ ज़रूरी है कि इंट्राडे ट्रेडिंग के कुछ बुनियादी नियम का पालन कर ही ट्रेडर ट्रेडिंग करें:

  • अपनी ट्रेडिंग स्ट्रेटजी की योजना बनाएं और उस पर टिके रहें।
  • ऐसे शेयरों की पहचान कर एक वॉचलिस्ट बनाए, जो इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए आदर्श हैं।
  • उस फंड के साथ ट्रेड करें जिसे आप गवांने का जोकिम ले सकते हैं और वह नुकसान आपकी वित्तीय स्थिति को प्रभावित नहीं करता हो। 
  • अच्छी तरह से शोध करें और उच्च लिक्विड वाले शेयरों को चुनें। आपका जो सवाल होता होगा के इंट्राडे के लिए स्टॉक कैसे चुनें, इससे वो भी हल हो जाएगा.
  • इंट्राडे ट्रेडिंग फॉर्मूला का इस्तेमाल कर स्टॉक के सपोर्ट और रेजिस्टेंस का आंकलन करें
  • अपने वित्तीय लाभ और हानि पर ट्रेक करे।
  • सभी खुली पोजिशनों को बंद करना सुनिश्चित करें।
  • ट्रेडिंग मे कूदने से पहले किसी एक इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीति की पूरी तरह से समझ होना आवश्यक है।
  • इसके अलावा, व्यक्तियों को नवीनतम शेयर बाजार समाचारों के साथ अपडेट रहना चाहिए और सही समय पर सही निर्णय लेने के लिए बाजार की प्रवृत्ति का पालन करना चाहिए।

निष्कर्ष

इस लेख में, हमने शुरुआती लोगों के लिए पॉच सर्वश्रेष्ठ इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीतियों को कवर किया है। यहाँ इस पोस्ट से कुछ प्रमुख निष्कर्ष दिए गए हैं:

  • इंट्राडे ट्रेड वे ट्रेड होते हैं जिनके लिए खरीदने और बेचने की गतिविधि एक ही दिन के भीतर करनी होती है।
  • इंट्राडे ट्रेडिंग में लगभग 90% समय योजना बनाने में जाता है और शेष 10% ट्रेड लेने में चला जाता है।
  • लिक्विडिटी, अस्थिरता, वॉल्यूम, धैर्य और निरंतरता इंट्राडे ट्रेडिंग के प्रमुख तत्व हैं। 
  • ट्रेड करने के लिए इंट्राडे ट्रेडिंग के नियमों (intraday trading rules in hindi) का पालन करें
  • यदि कोई एक सफल इंट्राडे ट्रेडर बनना चाहता है तो उसे पूरा समय और समर्पण देना होगा। तभी एक सफल ट्रेडर बनने के वारे में के वारे में सोच सकते है। 
  • ट्रेडर्स को हमेशा अच्छे जोखिम प्रबंधन की आवश्यकता होती है। इंट्राडे ट्रेड करते समय हमेशा सभी ऑर्डर के लिए स्टॉप लॉस अवश्य रखें।

शुरुआती लोगों के लिए Intraday Trading Strategy in Hindi पोस्ट के लिए बस इतना ही। तो अगर आप भी इंट्राडे ट्रेडिंग में ज़्यादा मुनाफा कामना चाहते है और सोच रहे है की intraday trading kaise sikhe तो उसके लिए आप स्टॉक मार्केट कोर्स ले सकते है या कुछ अच्छी किताबों का चयन कर अपने ज्ञान को बढ़ा सकते है


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न :- सबसे आसान इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीति क्या है?

उत्तर :- ब्रेकआउट ट्रेडिंग स्ट्रेटजी सबसे आसान इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीति है; इसमें वस आपको ऐसे स्टॉक्स को छांटना होता है जो ब्रेकआउट करने बाले है।

प्रश्न :- ब्रेकआउट ट्रेडिंग स्ट्रेटजी क्या है?

उत्तर :- जब स्टॉक की कीमतें किसी प्राइस लेवल या पेटर्न को ब्रेक कर ऊपर या नीचे गिरती हैं तो उसे ब्रेकआउट ट्रेडिंग स्ट्रेटजी के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न :- एक मोमेंटम स्ट्रेटजी क्या है?

उत्तर :- किसी स्टॉक के ट्रेंड को समझने और मोमेंटम की दिशा में ट्रेड करने की प्रकिया को मोमेंटम स्ट्रेटजी कहा जाता है।

प्रश्न :- इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए सबसे अच्छी स्ट्रेटजी कौन सी है?  

उत्तर :- इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए कई रणनीतियां हैं; कुछ बेहतरीन हैं – मोमेंटम ट्रेडिंग रणनीति, ब्रेकआउट ट्रेडिंग रणनीति, मूविंग एवरेज क्रॉसओवर रणनीत और रिवर्सल ट्रेडिंग रणनीति। कोई भी स्ट्रेटजी सीखने के साथ – साथ  अपने रिस्क को कैसे मैंनेज करना है और ट्रेडिंग के दौरान अपनी भावनाओं के द्वारा लिए गए गलत निर्णयों से कैसे बचना है ये सीखना भी उतना ही आवश्यक है जितना कि एक अच्छी स्ट्रेटजी को सीखना।

प्रश्न :- रिवर्सल ट्रेडिंग रणनीति क्या है? 

उत्तर :- रिवर्सल ट्रेडिंग ट्रेंड के खिलाफ की जाती है, जैसे कोई स्टॉक अगर ऊपर जा रहा है तो रिवर्सल ट्रेडर उसके ऊपरी टॉप पर सैल करने का अवसर तलाशते है। इसलिए यह जोखिम भरा है, खासकर शुरुआती लोगों के लिए, क्योंकि इसके लिए बेहतर ट्रेडिंग ज्ञान और अनुभव की आवश्यकता होती है। 


 

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