Intraday Trading Kaise Kare in Hindi

intraday trading kaise kare

शार्ट टर्म निवेश से लाभ कमाने के लिए इंट्राडे ट्रेडिंग एक अच्छा विकल्प है लेकिन कई ट्रेडर अक्सर सोचते हैं की इंट्राडे ट्रेडिंग कैसे करें? अगर आप भी ऐसी दुविधा में है तो इस लेख में जाने की intraday trading kaise kare in hindi.

अब शुरू करने से पहले जानते है की इंट्राडे ट्रेडिंग क्या होती है?

सरल भाषा में समझे में तो एक ही दिन के अंदर किये गए ट्रेड को इंट्राडे ट्रेड कहा जाता है, इसमें समय सीमा कम होती है इसलिए जोखिम ज़्यादा रहता है जिसके चलते एक ट्रेडर मुनाफा भी ज़्यादा कमा सकता है। 

अब इंट्राडे ट्रेडिंग करने के लिए सबसे ज़रूरी है एक ट्रेडिंग अकाउंट का होना, जिसके लिए आप एक सही स्टॉकब्रोकर का चयन कर सकते है, जो आपको कम ब्रोकरेज के साथ एक बेहतरीन ट्रेडिंग एप प्रदान करता हो

इंट्राडे ट्रेडिंग कैसे शुरू करें?

अब जैसे की हम बता चुके है की इंट्राडे ट्रेडिंग (intraday trading in hindi) शुरू करने के लिए एक ट्रेडिंग एप की ज़रुरत है और उसके बाद ज़रूरी है इंट्राडे ट्रेडिंग नियम (intraday trading rules in hindi) पालन करना। 

इसके साथ अगर आप सोच रहे की आपके लिए क्या इंट्राडे ट्रेडिंग सुरक्षित है या नहीं तो उसके लिए ज़रूरी है एक सही ज्ञान और समझ के साथ सही चरणों का पालन करना जिसके चलते आप स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग कर एक अच्छा मुनाफा कमा सकते है:

  • मार्केट पर नज़र रखे
  • स्टॉक्स का चयन करें
  • टेक्निकल एनालिसिस करे
  • सही समय में बाय और सेल करें
  • स्टॉप लॉस का इस्तेमाल करें

मार्केट पर नजर रखें 

हर दिन शेयर बाजार ट्रेडर के लिए एक नया अवसर लेकर आती है और इसी अवसर की सही समय में पहचान एक ट्रेडर को मुनाफा कमाने का मौका प्रदान करती है। तो इसलिए ट्रेडिंग में सफल होने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है मार्केट में नज़र बनाये रखना। 

इसके लिए जो कंपनी स्टॉक मार्केट में लिस्टेड है उससे जुड़ी खबरें पढ़ना और उसमे ट्रेड करने के लिए सही स्ट्रेटेजी को फॉलो करना। ऐसी कंपनी के स्टॉक में अस्थिरता देखने को मिलती है और उसी अस्थिरता का फायदा उठाकर एक ट्रेडर स्टॉक मार्केट में ट्रेड कर मुनाफा कमा सकता है।

हालांकि अथिरता  इंट्राडे ट्रेडर के लिए मुनाफा कमाने की उपलब्धि लाती है लेकिन उसी समय एक शुरूआती ट्रेडर के लिए ये नुक्सान का कारण भी बन सकती है, क्योंकि वोलेटाइल स्टॉक जितनी तेज़ी से ऊपर की ओर बढ़ते है उतनी ही तेज़ी के साथ वह नीचे भी गिरते है जिसका सीधा-सीधा प्रभाव उनके किये हुए ट्रेड पर पड़ता है। 


इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए स्टॉक कैसे चुने

अब मार्केट की न्यूज़ से तो आप अवगत हो गए लेकिन अब किस स्टॉक में ट्रेड करना ज़्यादा फायदेमंद रहेगा, उसके लिए ज़रूरी है की आप कुछ रणनीतियों का पालन करे और साथ में ट्रेडिंग टूल्स की जानकारी ले उन्हें इस्तेमाल करें

अब जैसे की हम जानते है की स्टॉक मार्केट में सिर्फ बढ़ते हुए स्टॉक्स ही नहीं गिरते हुए स्टॉक्स भी पैसा कमाने का मौका देते है, तो यहाँ पर मार्केट की न्यूज़ का किसी कंपनी या उसके स्टॉक  तरह का प्रभाव पड़ेगा उसकी जानकारी प्राप्त करे और उसके अनुसार अपनी वॉचलिस्ट में स्टॉक को एड करें

वोलैटिलिटी के साथ, स्टॉक की लिक्विडिटी भी बहुत ज़रूरी होता है और इसलिए ऐसे स्टॉक में ट्रेड करे जो वोलेटाइल होने के साथ-साथ लिक्विड भी हो। एक शुरूआती ट्रेडर को ऐसे स्टॉक से दूरी रखनी चाहिए जो लगातार अपर या लोअर सर्किट हिट कर रहा हो, क्योंकि ऐसे स्टॉक की पोजीशन से बहार निकलना चुनौतीपूर्ण होता है।


Technical Analysis in  Hindi

मार्केट रिसर्च और स्टॉक का चयन करने के बाद ज़रूरी पहलू आता है उस स्टॉक का विश्लेषण करना, जिसके लिए तकनीकी विश्लेषण का इस्तेमाल कर सकते है। एक शुरूआती ट्रेडर के लिए ये थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन एक सही समझ और ज्ञान के साथ आप इसकी मदद से ट्रेड कर इसमें मुनाफा कमा सकते है।

इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए टेक्निकल एनालिसिस करने के दो स्ट्रांग पिलर है कैंडलस्टिक चार्ट को  समझना और सही इंडिकेटर का इस्तेमाल करना

शेयर मार्केट चार्ट 

वैसे तो स्टॉक मार्केट में कई तरह के चार्ट होते है लेकिन एक डे ट्रेडर के लिए महत्वपूर्ण है चार्ट की सही समझ और उसका सही से पढ़ना। अब यहाँ पर कैंडलस्टिक चार्ट सबसे ज़्यादा जानकारी एक साथ प्रदान करने में लाभदायक है क्योंकि ये ट्रेडर को शेयर ओपनिंग और क्लोजिंग प्राइस के साथ हाई और लॉ की जानकारी भी प्रदान करते है।

यहाँ पर अगर स्टॉक का ओपनिंग प्राइस क्लोजिंग से कम है तो ग्रीन कैंडल और अगर ओपनिंग प्राइस क्लोजिंग से ज़्यादा है तो रेड कैंडल बनती है, साथ में कैंडल की विक उसके हाई और लॉ प्राइस की जानकारी देती है

ट्रेडिंग करने के लिए किस तरह से इस चार्ट को समझा जाये उसके लिए इसके पिछले कुछ दिनों के लॉ प्राइस के सपोर्ट और हाई प्राइस से रेजिस्टेंस की जानकारी मिल सकती है, अब ये सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्टॉक के प्राइस की भविष्यवाणी करने में मदद करते है। सपोर्ट और रेजिस्टेंस की जानकारी के लिए आप इंट्राडे ट्रेडिंग फॉर्मूला का इस्तेमाल कर सकते है जो आपको गणित का इस्तेमाल कर इनकी वैल्यू की जानकारी प्रदान करता है।

जैसे की अगर कोई स्टॉक तेज़ी से नीचे गिर रहा हो और वह अपने पिछले सपोर्ट को ब्रेक कर दे तो ये अनुमान लगाया जाता है की ये स्टॉक अब और नीचे गिर सकता है और ये एक शार्ट करने की उपलब्धि लेकर आता है, उसी तरह अगर कोई स्टॉक ऊपर बढ़ते हुए अपने रेजिस्टेंस से ऊपर चला जाये तो ये ब्रेकआउट लॉन्ग पोजीशन लेने का अवसर लेकर आता है

सपोर्ट और रेजिस्टेंस की जानकारी के बाद अब प्रश्न आता है कि किस प्राइस में स्टॉक में बाय और सेल किया जाए? इसके लिए आते है कुछ ख़ास इंडीकेटर्स जिसका विवरण नीचे दिया गया है

इसके साथ इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए चार्ट की सही सेटिंग करना भी काफी ज़रूरी होता है। इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए ज़्यादातर ट्रेडर 1-मिनट का चार्ट देखना लाभदायक समझते है और उसके अनुसार ही अपना ट्रेडिंग निर्णय लेते है।


Intraday Trading Indicators in Hindi

टेक्निकल इंडिकेटर वह टूल है जो मार्केट की गतिविधियों के बारे में काफी जानकारी देते है, इसमें कुछ इंडिकेटर लेगिंग तो कुछ लीडिंग इंडिकेटर होते है जो स्टॉक प्राइस में आने वाले उछाल और गिरावट का संकेत देते है और ट्रेडर्स को सही पोजीशन लेने में मदद करते है। लेकिन अब यहाँ पर ज़रूरी है इन इंडिकेटर को सही से समझना और इस्तेमाल करना।

एक शुरूआती ट्रेडर, मार्केट को समझने के लिए निम्नलिखित दिए गए इंडिकेटर (best indicator for intraday trading) का इस्तेमाल कर सकते है:

1. मूविंग एवरेज 

यह आमतौर पर सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला इंडिकेटर है। मूविंग एवरेज जैसे नाम से ही पता चलता है स्टॉक के पिछले दिनों के प्राइस के एवरेज की जानकारी देता है, अब क्योंकि स्टॉक मार्केट प्राइस निरंतर बदलता रहता है इसलिए इसका नाम मूविंग एवरेज है।

मूविंग एवरेज इंडिकेटर स्टॉक के पिछले समय के क्लोजिंग प्राइस के डेटा के अनुसार बनाया जाता है। अब ये किस तरह से लाभदायक है, मान लेते है की स्टॉक का विश्लेषण करने के लिए आपने 9 दिन का मूविंग एवरेज इंडिकेटर चुना, अब अगर ये इंडिकेटर स्टॉक के प्राइस को नीचे की ओर से क्रॉस करता है तो ये माना जाता है की स्टॉक का प्राइस अपने पिछले दिनों की तुलना में बेहतर है और मार्केट में तेज़ी का माहौल है, ऐसे में एक ट्रेडर लॉन्ग पोजीशन ले सकता है।

दूसरी ओर अगर मूविंग एवरेज नीचे की ओर से पार हो रही तो ये मंडी का संकेत और ट्रेडर के लिए शॉर्टिंग की उपलब्धि लेकर आता है

2. मूविंग एवरेज कनवर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD)

मूविंग एवरेज को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए आप MACD इंडिकेटर का उपयोग कर सकते है, जिसमे तीन अलग-अलग मूविंग एवरेज (12, 26, 9) का इस्तेमाल किया जाता है और एक बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है

MACD इंडिकेटर में दो तरह की लाइन होती है जिसमे से एक MACD लाइन और दूसरी सिग्नल लाइन होती है, एक ट्रेडर को ट्रेडिंग निर्णय लेने के लिए बस इन दो लाइन के बीच का क्रॉसओवर देखना

यहाँ पर अगर MACD लाइन सिग्नल लाइन को ऊपर की ओर काटती है तो बुलिश और अगर नीचे की और काटे तो बेयरिश ट्रेंड की जानकारी प्रदान करता है

3. बोलिंजर बेंड

ऊपर दिए हुए स्टॉक मार्केट में ट्रेंड की जानकारी देते है, और अगर आपको मार्केट की अस्थिरता की जानकारी लेनी है तो उसके लिए बोलिंजर बेंड दिए गए है। इस इंडिकेटर में दो बंद, अपर और लोअर बेंड होते है और बीच में 20 पीरियड मूविंग एवरेज की लाइन होती है।

अब अगर स्टॉक में अस्थिरता ज़्यादा है तो अपर और लोवर बंद में गैप ज़्यादा रहता और कम वोलैटिलिटी के चलते ये गैप कम हो जाता है, साथ ही मिडिल लाइन यानी की मूविंग एवरेज लाइन अस्थिरता के चलते सपोर्ट और रेजिस्टेंस की तरह काम करती है, जिसके सही से विश्लेषण और जानकारी लेकर आप स्टॉक में पोजीशन लेने के साथ-साथ टारगेट और स्टॉप लॉस की वैल्यू भी निर्धारित कर सकते है

4. RSI इंडिकेटर 

अगला महत्वपूर्ण इंडिकेटर है RSI जो मार्केट में ओवरबोट और ओवरसोल्ड स्थिति की जानकारी देता है। RSI इंडिकेटर 0-100 के स्केल के बीच में होता है, यहाँ पर 70 से ऊपर की वैल्यू ओवरबॉट और 30 से नीचे के वैल्यू ओवरसोल्ड कंडीशन को दर्शाती है।

अब ये वैल्यू अलग-अलग समय में अलग हो सकती और हर ट्रेडर अपनी स्ट्रेटेजी के अनुसार इससे इस्तेमाल करता है, लेकिन ये सिर्फ मार्केट की स्थिति की जानकारी देने में मदद करता है

साथ ही 70-30 के स्केल में 50 से को क्रॉस करने पर ट्रेडर लॉन्ग और नीचे जाने पर शार्ट पोजीशन ले सकते है

5. ADX इंडिकेटर

अभी तक हमने स्टॉक के एवरेज प्राइस, वोलैटिलिटी और overbought और oversold स्थिति की जानकारी प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किये जाते है, लेकिन अगर किसी ट्रेंड की मजबूती या सरल भाषा में कहे अगर आपको ये जानकारी प्राप्त करनी हो की मार्केट का ट्रेंड कितने समय तक ऐसे ही रहने वाला है तो उसके लिए ADX इंडिकेटर का उपयोग किया जा सकता है

अब इस इंडिकेटर की वैल्यू भी 0-100 के स्केल पर निर्धारित की जाती है और यहाँ पर अगर ADX की  वैल्यू अगर 25 से ज़्यादा है तो वह स्ट्रांग ट्रेंड की जानकारी देता है

समझने के लिए मान लेते है कि कोई स्टॉक निरंतर नीचे गिर रहा है तो यहाँ पर कितने और समय तक यही ट्रेंड रहेगा उसके लिए आप ADX देख सकते है, अगर ADX की वैल्यू 25 से ज़्यादा है तो ये अनुमान लगाया जाता है की अभी कुछ समय तक दोनट्रेंड देखने को मिलेगा

तो इस तरह से आप स्टॉक प्राइस की जानकारी और भविष्यवाणी के लिए इन इंडिकेटर का इस्तेमाल कर सकते है

इन सभी इंडिकेटर की जानकारी प्राप्त करने के बाद ये बात तो तय है की ये सभी इंडिकेटर किसी न किसी तरह स्टॉक मार्केट के निर्णय लेने में महत्वपूर्ण है तो किस इंडिकेटर का इस्तेमाल करना ज़्यादा फायदेमंद है, तो उसका जवाब है की कोई भी एक इंडिकेटर आपको मार्केट की गतिविधियों का सही संकेत नहीं दे सकते, इसलिए ज़रूरी है कि ट्रेड करने के लिए एक से ज़्याद इंडिकेटर का इस्तेमाल किया जाए, जैसे एक सही निर्णय के लिए आप RSI, Bollinger Bands और ADX इंडिकेटर को साथ में इस्तेमाल कर सकते है

RSI जहां पर आपको स्टॉक की स्थिति बताता है, वही पर bollinger उसकी वोलैटिलिटी और ADX ट्रेंड की स्ट्रेंथ की जानकारी प्रदान करता है


Intraday Trading Time in Hindi 

इंट्राडे ट्रेडिंग सत्र 9:15 में खुलता है और 3:30 बजे बंद होता है, लेकिन कई ट्रेडर यह सोचते हैं की इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए उपयुक्त समय कौन सा है? आमतौर पर नए लोगों शुरुआत के 15 मिनट ट्रेडिंग से दूर रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि शुरुआत के 15 मिनट जोखिम भरा हो सकता है पिछली रात के खबर से मार्केट प्रभावित होता है। ट्रेडर के लिए शुरुआत के 15 मिनट बाजार को आंकना चाहिए। 

9:30 से 10:30 का समय इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है।

दिन का शुरुआती समय आमतौर पर उच्च अस्थिरता को दर्शाता है, इससे यह सुनिश्चित होता है की इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए यह उत्तम समय है। 

शुरूआती समय उच्च अस्थिरता की वजह से ही नहीं बल्कि उच्च लिक्विडिटी की वजह से भी लाभदायक होता है। 


स्टॉप लॉस का इस्तेमाल करें 

इंट्राडे ट्रेडिंग जोखिमों से भरा है और उन्ही जोखिमों से बचने के लिए स्टॉप लॉस का इस्तेमाल करना काफी ज़रूरी हो जाता है। स्टॉप लॉस ट्रेडर को ज़्यादा नुक्सान होने से बचाता है। कितना स्टॉप लॉस (stop loss meaning in hindi) लगाए उसके लिए आप ऊपर समझाए गए चार्ट के सपोर्ट और रेजिस्टेंस का इस्तेमाल कर सकते है या इंडिकेटर की मदद से स्टॉप लॉस की ट्रिगर वैल्यू (trigger price meaning in hindi) टारगेट वैल्यू की जानकारी प्राप्त कर सकते है।

इसके अलावा आप अपने जोखिमों के आधार पर भी स्टॉप लॉस वैल्यू निर्धारित कर सकते है

उदाहरण के तौर पर यदि स्टॉक 110 रुपए पर ख़रीदा गया है और स्टॉप लॉस आर्डर 10% (99 रूपए) पर तय किया गया है, इस मामले में यदि कीमत 99 रुपए तक पहुँचती है और कीमत में गिरावट की सम्भावना होती है,

खुद-ब-खुद स्टॉप लॉस आर्डर एक्सेक्यूट हो जाता है, और ट्रेड 99 रुपए पर स्क्वायर ऑफ हो जाता है। जिससे यह सुनिश्चित हो जाता है की कोई भारी नुकसान नहीं हुआ है। और स्टॉप लॉस की रणनीति से ज्यादा नुकसान को दूर करता है, जब ट्रेंड आपके ट्रेडिंग निर्णय के विपरीत जाता है। 

यह इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए नुकसान को दूर करने का यह उचित या व्यक्तिगत विकल्प होता है। 


निष्कर्ष 

इंट्राडे ट्रेडिंग में ट्रेडर को काफी जल्द और सही निर्णय लेना होता है क्योंकि इसमें ट्रेडिंग टाइम काफी कम होता है। 

सही निर्णय लेने के लिए सबसे पहले रिसर्च  के आधार पर सही स्टॉक चुनने की जरुरत होती है और सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला चार्ट और टेक्निकल इंडीकेटर्स जैसेकि मूविंग एवरेज, बोलिंगर बैंड्स, MACD का उपयोग करके हम सही समय पर ट्रेड करके मुनाफा कमाने में आसानी होती है। इसके साथ एक शुरूआती ट्रेडर इंट्राडे ट्रेडिंग टिप्स (intraday trading tips in hindi) का भी इस्तेमाल कर सकता है।

और इसके साथ अगर आप स्टॉप लॉस का प्रयोग करते है तब यह ट्रेडिंग में होने वाले नुकसान को दूर करती है। 

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